इंदौर:भव्य बाणेश्वर लोक का भूमिपूजन, महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगा पर्यटन को मिलेगी रफ्तार, सिंहस्थ 2028 से पहले होगा पूरा

इंदौर। धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए एक बड़ा विकास प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में बाणेश्वर लोक नाम से एक भव्य धार्मिक परिसर तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित होगी और इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक अनुभव देना है। सिंहस्थ 2028 से पहले इसके पूरा होने की योजना है, जिससे शहर धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
महाकाल लोक की तर्ज पर
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में बाणेश्वर लोक नाम से एक भव्य धार्मिक परिसर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जिससे शहर की धार्मिक पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।
भूमिपूजन के साथ शुरू हुआ निर्माण कार्य
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत शुक्रवार को भूमिपूजन के साथ की गई। कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस मौके पर बताया गया कि यह प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में इंदौर को एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
बाणेश्वर कुंड का होगा कायाकल्प
यह पूरा प्रोजेक्ट बाणगंगा क्षेत्र में स्थित प्राचीन बाणेश्वर कुंड के आसपास विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में कुंड को उसके पुराने और पारंपरिक स्वरूप में संवारा जाएगा ताकि इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान बनी रहे। इसके बाद पूरे परिसर को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।
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15 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा भव्य परिसर
इस परियोजना पर लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। योजना के अनुसार, यहां एक भव्य प्रवेश द्वार बनाया जाएगा, विशाल शिव प्रतिमा स्थापित की जाएगी और पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं
बाणेश्वर लोक में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसमें प्रवचन हॉल, यज्ञशाला, सुंदर वाटिकाएं और साधु-संतों के लिए विश्राम स्थल शामिल होंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ लोगों को शांत और आध्यात्मिक वातावरण देना है।
सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य
सरकार और प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट को लेकर स्पष्ट लक्ष्य तय किया है कि इसे सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा कर लिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस दौरान लाखों श्रद्धालु उज्जैन के साथ-साथ इंदौर में भी धार्मिक स्थलों पर पहुंचेंगे। ऐसे में बाणेश्वर लोक एक अहम पड़ाव बन सकता है।
धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा
इस परियोजना से इंदौर में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद जिस तरह पर्यटन बढ़ा, उसी मॉडल को इंदौर में भी अपनाया जा रहा है। इससे होटल, ट्रांसपोर्ट, छोटे व्यापारियों और स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
सामाजिक बदलाव की दिशा में भी पहल
इस प्रोजेक्ट को सिर्फ धार्मिक विकास तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। इसके जरिए युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ने की योजना भी है। साथ ही नशा मुक्ति जैसे सामाजिक अभियानों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिससे यह परियोजना सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बनेगी।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
भूमिपूजन कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने इसे इंदौर के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उनका कहना है कि यह परियोजना शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगी और आने वाले समय में इंदौर को एक बड़े तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित करेगी।
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