पल्लवी वाघेला, भोपाल। सिंगिंग, डांसिंग, सोशल मीडिया यह भी अब करियर ऑप्शन हैं, लेकिन हमारे पेरेंट्स यह बात समझने को तैयार नहीं हैं। हम पांच दोस्तों का ग्रुप जब साथ में रील बनाता है तो रील पर हजारों व्यूज आते हैं, लेकिन हमारे पेरेंट्स को हमारा रील बनाना पसंद नहीं आ रहा। वो हमें डांटते हैं, हर वक्त पढ़ाई की बात करते हैं। मजबूरी में हमें चोरी-छिपे रील बनानी पड़ती है, लेकिन इसकी भनक भी उन्हें लग ही जाती है। यही वजह है कि हमें चुपचाप मुंबई जाने जैसा कदम उठाना पड़ा, ताकि किसी रियलिटी शो में खुद को प्रूव करके अपने मन का करियर चुन सकें। यह बात 14 और 16 साल के दो टीनएजर्स ने कही। इनमें लड़की की उम्र 16 साल और लड़के की 14 साल है। दोनों को भोपाल स्टेशन पर रेस्क्यू किया गया। यह आगे मुंबई जाने की तैयारी में थे।
टीनएजर्स सतना जिले से हैं। इन्होंने सीधे मुंबई जाने के बजाए भोपाल से मुंबई का प्लान किया। असल में इन्हें जानकारी लगी थी कि भोपाल में कोई टैलेंट एकेडमी है, लेकिन जब कोई खास जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने भोपाल रेलवे स्टेशन से ही मुंबई का टिकट लेने का प्लान कर लिया। हालांकि, इस बीच स्टेशन पर किसी ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर जानकारी दी। वहीं, बच्चों के पेरेंट्स ने भी लोकल स्टेशन पर बच्चों के भोपाल में होने की संभावना जताई थी इस आधार पर बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
जानकारी के मुताबिक यह 14 से 16 साल तक के पांच बच्चों का ग्रुप है। इसमें तीन लड़के और तीन लड़कियां हैं। भोपाल पहुंचे टीनएजर्स में किशोरी के पिता बैंक अधिकारी हैं वहीं 14 वर्षीय किशोर की मां डेंटिस्ट और पिता बिजनेस से जुड़े हैं। सभी बच्चे उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से हैं और बीते डेढ़ साल से रील बना रहे हैं। अब जैसे-जैसे बच्चों की क्लासेस बढ़ने लगी, पेरेंट्स को लगा कि उनका ध्यान रील के चक्कर में पढ़ाई से हट न जाए, इसलिए उन्होंने विरोध जताना शुरू कर दिया। किशोरी ने कहा कि पिता चाहते हैं कि वह भी आगे सिविल सर्विसेज में जाए, जबकि वह सिंगर और एक्ट्रेस बनना चाहती है।
दोनों टीनएजर्स ने बताया कि सभी बच्चों के यहां यही हो रहा था। ऐसे में पांचों दोस्तों ने मिलकर घर छोड़ने और मुंबई जाने की प्लानिंग की। सबने मिलकर पैसा इकट्ठा किया। चार दोस्तों का पैसा करीब 35 हजार रुपए था। वहीं, एक अन्य दोस्त रेलवे स्टेशन पर पैसा लेकर पहुंचने वाली थी। ऐन वक्त पर उसने आने से मना कर दिया। तब बाकी दो लड़के भी डर गए और स्टेशन से लौट गए। इन दोनों के पास वह 35 हजार रुपए थे। इसे लेकर दोनों ने आगे बढ़ने का फैसला किया। मामले में बच्चों के परिवार को अन्य दोस्तों से इस बात की जानकारी मिली और उन्होंने पुलिस में शिकायत की। मामले में बच्चों को उनके परिवार को सौंप दिया गया।
बच्चों की योग्यता व क्षमता का आकलन करना चाहिए या उनका साइकोमेट्रिक टेस्ट कराएं। अगर बच्चों में प्रतिभा या योग्यता है तो उसे उसकी पसंद का करियर चुनने दें। हां, उसे यह भी समझाएं कि शिक्षा, जीवन की आवश्यकता है, उससे मुंह नहीं मोड़ सकते। बच्चा आपकी बात जरूर सुनेगा।
दिव्या दुबे मिश्रा, काउंसलर