सोहागपुर क्षेत्र के देलाखाड़ी के सांगाखेड़ा गांव में एक बाघ को मारकर उसे जमीन में गाड़ देने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह घटना करीब दो दिन पहले की बताई जा रही है जिसने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृत बाघ करीब 3 से 4 साल का बताया जा रहा है और उसके गले में कॉलर आईडी लगी हुई थी। इसी कॉलर की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस की गई और पूरे मामले का खुलासा हुआ। जानकारी के अनुसार बाघ ने गांव के एक बैल का शिकार किया था जिसके बाद यह घटना हुई होने की आशंका जताई जा रही है।
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घटना सामने आने के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ का विधिवत अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि बाघ को पहले मारकर गाड़ देने की घटना ने वन्यजीव सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कॉलर आईडी लगे बाघ लगातार मॉनिटरिंग में रहते हैं इसके बावजूद इस तरह की घटना होना हैरत में डालने वाला है। इससे साफ है कि इलाके में गश्त और निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है।
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यह घटना इस बात का संकेत देती है कि भारी खर्च और तकनीकी निगरानी के बावजूद बाघ पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। अगर बाघ के पास कॉलर आईडी नहीं होती तो शायद इस घटना का पता भी नहीं चल पाता।
गंभीर और दुखद घटना है जहर दे कर मारा गया मामले में 5 लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं। आगे पूछताछ जारी है। सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। एल. कृष्णमूर्ति, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल, मध्य पदेश

आज बाघ का विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया गया है। जहर दे कर मारा गया है छिंदवाड़ा जिले के घटना है। आशीष खोबरागड़े, सहायक संचालक, सतपुडा टाइगर रिजर्व