NEET-PG में इंसेंटिव अंक नहीं मिलने पर डॉक्टर ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

मध्य प्रदेश में NEET-PG काउंसलिंग के दौरान इन-सर्विस कोटे और इंसेंटिव अंकों को लेकर कानूनी विवाद सामने आया है। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम में काम करने वाले एक डॉक्टर ने राज्य के चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दूरस्थ क्षेत्र में चार साल से ज्यादा सेवा देने के बावजूद उन्हें इन-सर्विस वेटेज और इंसेंटिव अंकों का लाभ नहीं दिया गया। मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
चार साल से ज्यादा दूरस्थ क्षेत्र में दी सेवाएं
याचिकाकर्ता डॉ. अभिषेक अग्निहोत्री का चयन केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम के माध्यम से हुआ था। उन्होंने मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के मझगवां स्थित एनएमडीसी लिमिटेड के डायमंड माइनिंग प्रोजेक्ट अस्पताल में चार साल से अधिक समय तक सेवाएं दी हैं। डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने कठिन और दूरस्थ क्षेत्र में काम किया, इसके बावजूद उन्हें NEET-PG काउंसलिंग में इन-सर्विस उम्मीदवार के तौर पर इंसेंटिव अंकों और कोटे का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
राज्य सरकार के कर्मचारियों को ही मिल रहा लाभ
याचिका में मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम, 2018 और उसके संशोधित प्रावधानों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, इन नियमों के तहत राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले सेवाकर्मियों को 30 प्रतिशत इन-सर्विस वेटेज और कोटे का लाभ दिया जा रहा है। उनका तर्क है कि नियमों में दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों को इन-सर्विस उम्मीदवार के रूप में पात्र माना गया है। इसके बावजूद केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम के तहत दूरस्थ क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टर को इस लाभ से बाहर रखना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
मामले की प्रारंभिक सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को निर्धारित की गई है।




















