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स्टैनफोर्ड की नई खोज: हमारा दिमाग एक नहीं, दो अलग-अलग कोशिका समूहों से होता है विकसित

स्टैनफोर्ड की नई रिसर्च में सामने आया है कि इंसानी दिमाग का विकास शुरुआत में दो अलग-अलग कोशिका समूहों से होता है।
स्टैनफोर्ड की नई खोज: हमारा दिमाग एक नहीं, दो अलग-अलग कोशिका समूहों से होता है विकसित

वॉशिंगटन। हमारा दिमाग शरीर का सबसे जटिल अंग है। सोचने, समझने, याद रखने और भाषा सीखने से लेकर सांस लेने, दिल की धड़कन और निगलने जैसी जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करने तक, दिमाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। अब स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के चिकित्सा वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने दिमाग के विकास को समझने का तरीका बदल दिया है। सितंबर 2026 में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, इंसानी दिमाग का विकास शुरुआत में एक ही तरह की कोशिकाओं के समूह से नहीं होता बल्कि दो अलग-अलग कोशिका समूहों से होता है। एक समूह से दिमाग का आगे और बीच का हिस्सा विकसित होता है, जबकि दूसरे समूह से पीछे का हिस्सा बनता है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इंसान के सिर में दो अलग-अलग दिमाग होते हैं। वयस्क अवस्था में हमारा दिमाग एक ही अंग के रूप में काम करता है। नई खोज दिमाग के भ्रूण अवस्था में विकास से जुड़ी है।

दिमाग के विकास की कहानी में बड़ा बदलाव

वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि भ्रूण के विकास के दौरान दिमाग की अलग-अलग कोशिकाएं किस तरह बनती और अपने तय स्थान तक पहुंचती हैं। स्टैनफोर्ड की टीम ने चूहों के भ्रूण पर अध्ययन किया और पाया कि दिमाग के विकास की शुरुआत में दो अलग-अलग कोशिका समूह दिखाई देते हैं। दोनों समूह अपनी-अपनी दिशा में आगे बढ़ते हैं और बाद में दिमाग के अलग-अलग हिस्सों का निर्माण करते हैं। पहले समूह से दिमाग का आगे और बीच का हिस्सा बनता है, जबकि दूसरे समूह से दिमाग का पिछला हिस्सा विकसित होता है। खास बात यह है कि विकास की शुरुआती प्रक्रिया में ये दोनों कोशिका समूह आपस में मिलते नहीं हैं।

दिमाग के तीन प्रमुख हिस्से

आसान भाषा में समझें तो दिमाग को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में समझा जाता है।

  • पहला है अग्र मस्तिष्क, जहां सोचने, समझने, तर्क करने, भाषा सीखने और याददाश्त जैसी कई जटिल गतिविधियां होती हैं।
  • दूसरा है मध्य मस्तिष्क, जो शरीर और मस्तिष्क के बीच कई महत्वपूर्ण संकेतों के संचालन में भूमिका निभाता है।
  • तीसरा है पश्च मस्तिष्क, यह शरीर की कई जरूरी और अपने आप होने वाली गतिविधियों से जुड़ा है। सांस लेना, निगलना और दिल की धड़कन जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है।

नई खोज में सामने आया है कि इन हिस्सों के विकास की शुरुआती जैविक प्रक्रिया एक जैसी नहीं है।

यह बाएं और दाएं दिमाग वाली बात नहीं है

इस खोज को दिमाग के बाएं और दाएं हिस्से से जुड़ी पुरानी चर्चा से नहीं जोड़ना चाहिए। आम तौर पर जब बाएं और दाएं दिमाग की बात की जाती है तो मस्तिष्क के दो गोलार्धों की चर्चा होती है। स्टैनफोर्ड की यह खोज उससे अलग है। यह अध्ययन इस बात पर केंद्रित है कि दिमाग का आगे और पीछे का हिस्सा भ्रूण के विकास के दौरान किन अलग-अलग कोशिका समूहों से बनता है।

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लाखों साल पुराने विकास से जुड़ा सुराग

शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को केवल चूहों में ही नहीं देखा। अलग-अलग जीवों के अध्ययन में भी इसी तरह के विकास के संकेत मिले हैं। शोध में मुर्गी, जेब्राफिश और बंदर जैसी प्रजातियों के साथ एकॉर्न वर्म जैसे जीवों में भी इस तरह की अलग-अलग विकास प्रक्रिया के प्रमाण मिले। इससे वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिमाग के दो अलग-अलग विकास मार्गों की जड़ें बहुत पुरानी जैविक विकास प्रक्रिया में हो सकती हैं। यानी आज का जटिल दिमाग अचानक एक ही व्यवस्था से नहीं बना, बल्कि इसके विकास में अलग-अलग प्राचीन तंत्रों की भूमिका रही हो सकती है।

गंभीर बीमारियों के अध्ययन में मिल सकती है मदद

इस खोज का महत्व सिर्फ दिमाग के विकास को समझने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे प्रयोगशाला में दिमाग की खास तरह की कोशिकाएं तैयार करने में मदद मिल सकती है। यह मांसपेशियों को कमजोर करने वाली गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारियों, जैसे एएलएस और एसएमए, के अध्ययन के लिए उपयोगी हो सकता है। अगर वैज्ञानिक यह समझ सकें कि दिमाग की अलग-अलग कोशिकाएं विकास के दौरान किस स्रोत से बनती हैं, तो प्रयोगशाला में उन्हीं कोशिकाओं को अधिक सटीक तरीके से तैयार करना संभव हो सकता है। इससे बीमारी को समझने और भविष्य में उपचार से जुड़ी खोजों के लिए बेहतर मॉडल तैयार किए जा सकते हैं।

तो क्या इंसान के पास दो दिमाग हैं?

इंसान के पास एक ही दिमाग है और वयस्क अवस्था में यह एक साथ मिलकर काम करता है। नई खोज सिर्फ यह बताती है कि दिमाग के विकास की शुरुआत दो अलग-अलग कोशिका समूहों से होती है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि हमारा दिमाग आज भले ही एक ही अंग है लेकिन उसके बनने की शुरुआती कहानी दो अलग-अलग जैविक रास्तों से शुरू होती है। स्टैनफोर्ड की यह खोज दिमाग के विकास और उसके विकासवादी इतिहास को समझने के साथ-साथ तंत्रिका संबंधी बीमारियों पर होने वाले भविष्य के शोध के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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