नई दिल्ली/लेह। लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने उनके ऊपर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) हटाने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा।
इस फैसले के साथ ही वांगचुक की करीब साढ़े पांच महीने से चली आ रही हिरासत समाप्त होने का रास्ता साफ हो गया है। वह सितंबर 2025 से जोधपुर जेल में बंद थे और अब लगभग 170 दिन बाद उनकी रिहाई संभव हो सकेगी। सरकार का कहना है कि वांगचुक ने NSA के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है, इसलिए इस कानून को हटाने का निर्णय लिया गया है।
लद्दाख प्रशासन ने 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया था। इससे दो दिन पहले यानी 24 सितंबर 2025 को लेह में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। प्रशासन ने आरोप लगाया था कि इस हिंसा को भड़काने में वांगचुक की भूमिका रही। इसी आरोप के आधार पर उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें जोधपुर की जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (National Security Act) एक ऐसा कानून है, जो सरकार को विशेष परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए हिरासत में रखने की अनुमति देता है। इस कानून के तहत अगर किसी व्यक्ति से देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय हित को खतरा माना जाता है, तो प्रशासन उसे हिरासत में ले सकता है। NSA के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। हालांकि, सरकार समय-समय पर समीक्षा के आधार पर इस हिरासत को समाप्त भी कर सकती है।
सितंबर 2025 में लद्दाख में लंबे समय से चल रहा आंदोलन अचानक हिंसक हो गया था। लद्दाख के लोग लंबे समय से दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे-
इन मांगों को लेकर सितंबर के महीने में लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने चल रहे थे।
आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से हुई थी।
हिंसा के दौरान कई गंभीर सामने आईं घटनाएं-
इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई और 150 से अधिक लोग घायल हो गए।
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस और सुरक्षाबलों को सख्त कदम उठाने पड़े। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए, कई जगह लाठीचार्ज भी किया गया। हिंसा में 10 से 12 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने पूरे लेह शहर में कर्फ्यू लगा दिया।
सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास को लेकर लंबे समय से काम करते रहे हैं। इसके अलावा वांगचुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वह लद्दाख के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल से विकास के मॉडल को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।
लद्दाख में चल रहे आंदोलन में वांगचुक एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए थे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा था कि लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा जरूरी है। हालांकि, प्रशासन ने आरोप लगाया कि उनके आह्वान और भाषणों के कारण प्रदर्शन का माहौल उग्र हुआ, जिसके बाद उन्हें NSA के तहत हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद सोनम वांगचुक को लद्दाख से राजस्थान के जोधपुर की जेल में भेज दिया गया था। पिछले करीब साढ़े पांच महीने से वे वहीं बंद थे। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने उनकी रिहाई की मांग भी उठाई थी।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वांगचुक ने NSA के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस कानून को हटाने का निर्णय लिया गया है।
NSA हटाए जाने के बाद वांगचुक की रिहाई की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उनके खिलाफ अन्य कानूनी मामलों की स्थिति क्या होगी और रिहाई के बाद उन्हें किन शर्तों का पालन करना होगा।