विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली!2026 में अब तक भारतीय बाजार से निकाले ₹2.87 लाख करोड़, सिर्फ 15 दिनों में ₹62,853 करोड़ की निकासी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की भारतीय शेयर बाजार से लगातार बिकवाली जारी है। जून 2026 के पहले 15 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से ₹62,853 करोड़ से ज्यादा की रकम निकाल ली है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक इसके साथ ही साल 2026 में अब तक कुल विदेशी निकासी ₹2.87 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।
15 दिनों में ₹62,853 करोड़ की बिकवाली
यह आंकड़ा पूरे साल 2025 में हुई कुल विदेशी बिकवाली ₹1.66 लाख करोड़ से भी काफी ज्यादा है। लगातार हो रही इस भारी निकासी ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ाई है। साल की शुरुआत जनवरी में ₹35,962 करोड़ की बिकवाली से हुई थी। फरवरी में कुछ राहत जरूर मिली और विदेशी निवेशकों ने करीब ₹22,615 करोड़ का निवेश किया लेकिन इसके बाद मार्च में फिर से बड़ी बिकवाली देखने को मिली। मार्च में विदेशी निवेशकों ने ₹1.17 लाख करोड़ से ज्यादा के शेयर बेच डाले। अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मई में ₹32,963 करोड़ की निकासी हुई। अब जून के पहले 15 दिनों में ही बिकवाली ₹62,853 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
ग्लोबल अनिश्चितता सबसे बड़ी वजह
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता है। अमेरिका समेत दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति को लेकर निवेशकों में असमंजस बना हुआ है। इसके अलावा जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल आर्थिक ग्रोथ को लेकर भी चिंता बढ़ी हुई है।
भारत का महंगा वैल्यूएशन भी बना वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि कई अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार अभी भी महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक भारत में निवेश को लेकर फिलहाल काफी चुनिंदा रवैया अपना रहे हैं।
कमजोर होता रुपया बढ़ा रहा दबाव
रुपये में लगातार गिरावट भी विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। RBI की कोशिशों के बावजूद भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। साल 2026 में अब तक रुपया करीब 6% कमजोर हो चुका है जबकि पिछले एक साल में इसमें करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है। रुपया पहले मिड-80 के स्तर पर था जो अब डॉलर के मुकाबले करीब 95 तक पहुंच गया है। कमजोर करेंसी का सीधा असर विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर पड़ता है, इसलिए वे लगातार पैसा निकाल रहे हैं।
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हालांकि बिकवाली की रफ्तार थोड़ी घटी
पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में विदेशी बिकवाली की रफ्तार थोड़ी कम जरूर हुई है। शुक्रवार को कैश मार्केट में FPIs ने केवल ₹1,082 करोड़ के शेयर बेचे जो पहले के मुकाबले काफी कम है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि बाजार में दबाव अभी बना हुआ है लेकिन घबराहट धीरे-धीरे कम हो रही है।
कच्चे तेल में गिरावट भारत के लिए राहत
इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारत के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे चालू खाते के घाटे और आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है।
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डेट मार्केट में दिखा विदेशी भरोसा
जहां इक्विटी बाजार से विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं वहीं भारतीय डेट मार्केट में उन्होंने भरोसा दिखाया है। जून के पहले 15 दिनों में FPIs ने FAR रूट के जरिए भारतीय डेट सिक्योरिटीज में ₹13,200 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। इसके साथ ही साल 2026 में अब तक कुल डेट निवेश करीब ₹28,000 करोड़ तक पहुंच गया है।












