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बेटे की गाड़ी बनी कमाई का जरिया!पंचायत निधि से 5 लाख से ज्यादा भुगतान,तीन पर FIR

बिना टेंडर और ग्रामसभा की अनुमति के बेटे का वाहन पंचायत में अटैच कराने का आरोप; किराए की 5 लाख से ज्यादा राशि उसके खाते में पहुंची, तत्कालीन सचिव-सरपंच समेत तीन पर केस
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पंचायत निधि से 5 लाख से ज्यादा भुगतान,तीन पर FIR
फाइल फोटो

इंदौर। ग्राम पंचायत के कामकाज में पद और सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। आरोप है कि ग्राम पंचायत बांक के तत्कालीन सचिव ने अपने ही बेटे के वाहन को नियमों को दरकिनार करते हुए पंचायत में अटैच कराया और उसके किराए का भुगतान पंचायत निधि से कराया। जांच में भुगतान की राशि सचिव के बेटे के खाते में पहुंचने की बात सामने आने के बाद लोकायुक्त ने तत्कालीन सचिव, तत्कालीन सरपंच और सचिव के बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

 लोकायुक्त पुलिस के डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक मामले में ग्राम पंचायत बांक के तत्कालीन सचिव प्रहलाद नील के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में सरकारी प्रक्रिया का पालन किए बिना निजी वाहन को पंचायत के काम में लगाए जाने और पंचायत निधि से भुगतान कराने के आरोप लगाए गए थे।

अपने बेटे की गाड़ी को पंचायत में कराया अटैच

लोकायुक्त की जांच के अनुसार तत्कालीन सचिव प्रहलाद नील ने अपने बेटे धीरज नील के वाहन को पंचायत में सफाई और अन्य कार्यों के लिए अटैच कराया। आरोप है कि वाहन लगाने के लिए न तो टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही ग्रामसभा से अनुमति ली गई। इसके बाद वाहन के किराए के भुगतान के लिए पंचायत स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया गया। आरोप है कि इस प्रस्ताव पर तत्कालीन सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर हुए और पंचायत निधि से वाहन के किराए का भुगतान किया गया।

 

सरकारी भुगतान बेटे के खाते में पहुंचने का आरोप

लोकायुक्त जांच में सामने आया कि वाहन के किराए के नाम पर किया गया भुगतान सचिव के बेटे धीरज नील के बैंक खाते में पहुंचा। शिकायतकर्ता के मुताबिक यह राशि पांच लाख रुपए से अधिक है।जांच एजेंसी ने प्रथम दृष्टया इसे नियमों के उल्लंघन और निजी हित से जुड़े व्यक्ति को आर्थिक लाभ पहुंचाने से जोड़कर देखा है। इसी आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है।

सरपंच और सचिव की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले में तत्कालीन सचिव के साथ तत्कालीन सरपंच लक्ष्मीबाई चौहान की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि वाहन के भुगतान से संबंधित प्रस्ताव पर सरपंच और सचिव के स्तर से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। लोकायुक्त पुलिस ने प्रहलाद नील, लक्ष्मीबाई चौहान और धीरज नील के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

 

2018 से भ्रष्टाचार की शिकायत का दावा

मामले के शिकायतकर्ता जाकिर खान ने दावा किया कि ग्राम पंचायत बांक में वर्ष 2018 से लगातार भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें कीं और बाद में लोकायुक्त पुलिस तक मामला पहुंचाया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पंचायत के कामकाज में अनियमितताओं को लेकर लगातार आवाज उठाई गई, जिसके बाद अब लोकायुक्त ने तत्कालीन सरपंच, सचिव और सचिव के बेटे की भूमिका की जांच शुरू की है।

लोकायुक्त ने शुरू की आगे की जांच

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार एफआईआर दर्ज करने के बाद मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच में वाहन को पंचायत में अटैच करने की प्रक्रिया, ग्रामसभा की अनुमति, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, बैंक खाते में पहुंची राशि और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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