Peoples Update Special :सोलर कंपनियों के लिए बैटरी स्टोरेज जरुरी, डिस्कॉम लेगा महंगी बिजली, विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया ड्राफ्ट

विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा महंगी बिजली खरीद का अंतिम वित्तीय भार  'फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट ' (एफसीएए) या टैरिफ हाइक (बिजली दरों में बढ़ोतरी) से सीधे आम उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। यानी आम जनता के बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
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सोलर कंपनियों के लिए बैटरी स्टोरेज जरुरी, डिस्कॉम लेगा महंगी बिजली, विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया ड्राफ्ट

लेखक : संतोष चौधरी, भोपाल। मप्र विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) ने राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नया मसौदा जारी किया है। इसमें बड़ी सोलर उत्पादक कंपनियों को बैटरी एनर्जी स्टोरेज करना होगा। इससे बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी और जरूरत के समय कमी नहीं होगी। वहीं बिजली विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सोलर एनर्जी महंगी हो जाएगी, जिसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। 
दरअसल, आयोग सोलर उत्पादकों के लिए नया नियम लागू करने की तैयारी में है। मसौदे के मुताबिक, वितरण कंपनियों को रिन्यूएबल परचेज |ऑब्लिगेशन (आरपीओ - नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व) को पूरा करने के लिए कम से कम 1.5 प्रतिशत बिजली ऐसे बड़े सौर ऊर्जा उत्पादकों से खरीदनी होगी, जो ऊर्जा भंडारण  की सुविधा देते हों।

अभी तक यह व्यवस्था है

सोलर कंपनियां सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक सूरज की रोशनी में जितनी बिजली पैदा करती थीं, उसे सीधे ग्रिड में डाल दिया जाता था और उसकी खपत भी उसी रियल-टाइम (उसी समय) में हो जाती थी। दिन के समय सोलर पावर प्रचुर मात्रा में और सस्ती उपलब्ध होती थी।

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1.5% हिस्सा ऊर्जा भंडारण के जरिए करना होगा पूरा

मसौदे के अनुसार वर्ष 2026-27 में विद्युत वितरण कंपनियों को कुल खरीदी गई बिजली का 1.5 प्रतिशत हिस्सा ऊर्जा भंडारण के जरिए पूरा करना होगा। इसके बाद यह लक्ष्य 2027-28 में 2 प्रतिशत, 2028-29 में 2.5 प्रतिशत और 2029-30 में बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह सुविधा मुख्य रूप से बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के तहत ही मान्य की जाएगी। इस नए नियम का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने के आसार हैं।

अब क्या बदलेगा

अब सोलर उत्पादकों को दिन में पैदा होने वाली बिजली का एक हिस्सा अनिवार्यत: बैटरी सिस्टम में स्टोर (संग्रहित) करना होगा। इसके बाद, इस स्टोर्ड बिजली को शाम के समय ( पीक आॅवर्स - जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है) वितरण कंपनियों को सप्लाई करना होगा।

आम जनता पर असर

विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा महंगी बिजली खरीद का अंतिम वित्तीय भार  'फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट ' (एफसीएए) या टैरिफ हाइक (बिजली दरों में बढ़ोतरी) से सीधे आम उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। यानी आम जनता के बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

ये आएंगी चुनौतियां

कंपनियों का बढ़ेगा खर्च: सोलर उत्पादकों को भारी-भरकम बैटरी सिस्टम  विकसित करने के लिए बड़ी अतिरिक्त राशि का निवेश करना होगा। एक मेगावॉट प्लांट के लिए बैटरी सिस्टम पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च आएगा।
डिस्कॉम को मिलेगी महंगी बिजली: सोलर कंपनियों का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ने से वे बिजली की दरें भी बढ़ाएंगी। नतीजतन, वितरण कंपनियों को स्टोर्ड बिजली महंगी दरों पर खरीदनी पड़ेगी।

10 जुलाई तक आपत्तियां

मप्र विद्युत नियामक आयोग ने आमजनों से 10 जुलाई तक लिखित दावे- आवत्तियां बुलाई हैं। इस पर 22 जुलाई को जनसुनवाई होगी। इसके बाद ही नियामक आयोग निर्णय लेगा।

सेवानिवृत्त, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जेनको राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बैटरी सिस्टम विकसित करने में सोलर कंपनियों पर अतिरिक्त खर्च आएगा। इससे वितरण कंपनियों को महंगी बिजली खरीदना होगा, जिसका भार उपभोक्ता पर ही होगा। 

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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