Peoples Update Special :ई20 पेट्रोल के साइड इफैक्ट आने लगे सामने; झटके लेकर बंद हो रही गाड़ियां, वाहन चालक बोले- इंजन में भर रहा पानी

लेखक : प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। ई 20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। मैकेनिक और वाहन चालकों का मानना है कि इससे इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और स्टार्टिंग से जुड़ी दिक्कतें बढ़ गई हैं। वहीं, आॅटोमोबाइल विशेषज्ञ इसे महज तकनीकी मिथक मानते हैं। इस बहस के बीच पीपुल्स समाचार ने शहर के वाहन चालकों, ऑटो मैकेनिक और तकनीकी विशेषज्ञों से बातचीत की। बातचीत में शामिल करीब 40 प्रतिशत वाहन चालकों ने दावा किया कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी गाड़ियों में स्टार्टिंग, पिकअप और बार-बार खराबी जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। वहीं, 25 प्रतिशत चालकों का कहना था कि इंजन में किसी बड़े बदलाव का अनुभव नहीं हुआ, लेकिन पहले की तुलना में माइलेज जरूर कम हुआ है। दूसरी ओर मैकेनिकल और केमिकल इंजीनियर इन दावों से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि निर्माता की अनुशंसा के अनुरूप वाहनों में ई 20 के कारण इंजन खराब होने का कोई स्थापित तकनीकी प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
माइलेज कम हुआ, एक बार में स्टार्ट नहीं होती
सबसे बड़ी दिक्कत पांच छह साल पुरानी गाड़ियों में सामने आ रही है। जो गाड़ियां 2018 के पहले बनी थीं, उनमें 80 फीसदी के इंजन में पानी भरने, स्टार्टिंग प्रॉब्लम के साथ ओवर फ्यूल कंजम्शन की दिक्कत हो रही है। करीब 80 वाहन मालिकों का कहना था कि एवरेज कम हो गया। यही नहीं 75 प्रतिशत मैकेनिकों का कहना था इस पेट्रोल से इंजन पर लोड बढ़ा है।
पेट्रोल में पानी जैसा दिख रहा
अधिकांश मैकेनिकों ने बताया कि पेट्रोल को हवा में देखो तो अंतर साफ दिखेगा। पेट्रोल में पानी जैसा तरल पदार्थ अलग दिखता है, ये ही इंजन को खराब कर रहा है। इससे इंजन के अधिक गर्म होने और आइडलिंग में अस्थिरता होने लगती है। पिकअप घटने, कोल्ड स्टार्ट में दिक्कत, इंजन नॉकिंग, मिसफायर, फ्यूल इंजेक्टर के चोक होने, फ्यूल पंप पर अतिरिक्त दबाव और बार-बार सर्विसिंग की जरूरत पड़ रही है।
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वैज्ञानिक अध्ययन अभी सीमित
आॅटोमोबाइल इंजीनियरों का कहना है कि यह फिलहाल दावे हंै, जिसे व्यापक तकनीकी अध्ययन से अभी प्रमाणित नहीं किया गया है। दुनिया के कई देश एथेनॉल को र्इंधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। वाहन की उम्र, सर्विसिंग का अंतराल, स्पेयर पार्ट्स की गुणवत्ता, र्इंधन की शुद्धता और ड्राइविंग पैटर्न जैसे कई कारक भी इंजन की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।
ई 20 पेट्रोल क्या है, किन वाहनों के लिए उपयुक्त?
ई 20 ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित आॅक्सीजन युक्त र्इंधन है, जो पेट्रोल के साथ मिश्रित होकर उपयोग किया जाता है। यह एक बायोफ्यूल है जो गन्ने, मक्का और चावल जैसे प्राकृतिक कृषि स्रोतों से बनता है। इससे गाड़ियों से निकलने वाले हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों और कार्बन मोनोआॅक्साइड के उत्सर्जन में भारी कमी आती है।
अलग- अलग ऑटो मैकेनिक ने क्या कहा
ऑटो मैकेनिक राजेश वर्मा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में फ्यूल सिस्टम और इंजन संबंधी शिकायतों वाले वाहनों की संख्या बढ़ी है। उनके अनुसार पहले जहां महीने में एक-दो ऐसे वाहन आते थे, अब औसतन तीन से चार वाहन समान शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं।
एक अन्य ऑटो मैकेनिक आशु ने बताया कि पेट्रोल के साथ पानी अलग दिखता है। पिछले कुछ महीनों में फ्यूल सिस्टम और इंजन से जुड़ी शिकायतें पहले से ज्यादा देखने को मिल रही हैं। तकनीकी जांच हर गाड़ी में अलग होती है, लेकिन शिकायतों की संख्या पहले की तुलना में जरूर बढ़ी है।
ई20 इथेनॉल पर प्रो. आरके मंडलोई, पूर्व एचओडी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, मैनिट का कहना है कि यह कोई नया ईंधन नहीं है। हम 2008 से इस पर काम कर रहे हैं। 20 पुराने वाहनों में थोड़ी बहुत दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन अधिकतर वाहन इसके उपयुक्त हैं। 2018 के बाद से सभी वाहन ई 20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त हैं।
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इथेनॉल एक ऑक्सीजन युक्त बायोफ्यूल- छात्र
केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र संदीप मिश्रा ने बताया कि इथेनॉल एक ऑक्सीजन युक्त बायोफ्यूल है, जिसकी रासायनिक संरचना पेट्रोल से अलग होती है। सही अनुपात और मानक गुणवत्ता में मिश्रित ई20 र्इंधन इंजन के दहन को प्रभावित तो करता है, लेकिन इसे नुकसान पहुंचाना वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है। र्इंधन की गुणवत्ता, पुराने रबर पार्ट्स, रखरखाव की कमी या वाहन की तकनीकी स्थिति जैसे कई कारण हो सकते हैं।











