पितृ मोक्ष अमावस्या पर श्री रेवा कुब्जा संगम में उमड़े श्रद्धालु, घाट पर हुआ तर्पण
सोहागपुर। श्री रेवा कुब्जा संगम के अलावा रेवा, बनखेड़ी, ईश्वरपुर, गलचा, माछा, सांगा खेड़ा और सूरजकुंड सहित अन्य घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भीड़ और मेले को देखते हुए घाटों पर पुलिस तैनात रही, वहीं टीआई, एसडीओपी, एसडीएम और तहसीलदार ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
पितृ मोक्ष अमावस्या पर संगम में उमड़ी भीड़
पितृ मोक्ष अमावस्या पर अजेरा स्थित श्री रेवा कुब्जा संगम में पितरों के तर्पण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संगम में डुबकियां लगाने के साथ हवन-पूजन और भंडारे के आयोजन होते रहे। श्रद्धालुओं ने पितरों की मुक्ति और उनकी स्मृति में धार्मिक अनुष्ठान किए।
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आसपास के घाटों पर भी पहुंचे श्रद्धालु
श्री रेवा कुब्जा संगम के अलावा रेवा, बनखेड़ी, ईश्वरपुर, गलचा, माछा, सांगा खेड़ा और सूरजकुंड सहित अन्य स्थानों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अमावस्या पर नर्मदा घाटों पर भीड़भाड़ और मेले जैसी स्थिति रही, जिसे देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाएं संभालीं।
घाटों पर पुलिस तैनात, अधिकारियों ने लिया जायजा
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सभी घाटों पर पुलिस की तैनाती की गई थी। बड़े नर्मदा घाटों पर भीड़भाड़ और मेले के चलते टीआई, एसडीओपी, एसडीएम और तहसीलदार ने भी दौरे किए और व्यवस्थाओं का जायजा लिया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
रेवा कुब्जा संगम का धार्मिक महत्व
पितृपक्ष में पितरों की मुक्ति के लिहाज से माता सरस्वती की तपोस्थली रेवा कुब्जा संगम का विशेष महत्व बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस संगम का महत्व स्वयंभू भगवान शंकर ने माता पार्वती और कुमार कार्तिकेय को बताया था। इसी मान्यता के चलते पितृ मोक्ष अमावस्या पर यहां श्रद्धालु तर्पण और पूजन के लिए पहुंचते हैं।
नर्मदा पुराण में भी संगम का जिक्र
श्री नर्मदा पुराण के 21वें अध्याय के चौथे श्लोक का जिक्र करते हुए बताया जाता है कि मार्कंडेय ऋषि ने धर्मराज युधिष्ठिर के कुब्जा संगम का महत्व पूछने पर भगवान शंकर द्वारा बताए गए प्रसंग का वर्णन किया था। इसमें कहा गया है कि गया, गंगा और सरस्वती जाने के बजाय कुब्जा और नर्मदा के संगम के विलक्षण महत्व का दर्शन करना चाहिए। श्लोक में इस संगम को अनेक प्रमुख तीर्थों के समान महत्व वाला बताया गया है।
शिवलोक से जुड़ी मान्यता, अजेरा गांव में स्थित संगम
श्री नर्मदा पुराण के वाचक श्री हरि शरणम महाराज सीताराम जी पांडे ने श्लोक का उल्लेख करते हुए बताया कि मान्यता के अनुसार, कुब्जा संगम पर शरीर त्यागने वाला व्यक्ति 20 लाख वर्षों तक शिवलोक का वासी होता है और इस संगम का महत्व कहने-सुनने वाले भी शिवलोक में पूजित होते हैं। सोहागपुर से करीब 20 से 22 किलोमीटर और शोभापुर से लगभग 12 से 15 किलोमीटर दूर नर्मदा के दक्षिणी तट पर अजेरा गांव स्थित है, जहां माता सरस्वती ने तपस्या की थी।























