वाराणसी। महिला आरक्षण को लेकर देश की संसद से लेकर वाराणसी तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में ‘नारी शक्ति वंदन’ से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी वाराणसी पहुंचे। यहां दोनों नेताओं ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में स्मृति ईरानी ने समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव के हालिया बयान पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा, परंपरागत सीट से चुनाव लड़ना बहुत आसान होता है, लेकिन एक कामकाजी महिला होकर मैंने किसी और के गढ़ में जाकर जीत हासिल की और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को हराया।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव में दमखम है तो वे अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं। ईरानी ने यह भी कहा कि कामकाजी महिलाओं पर टिप्पणी करना आसान है, खासकर उनके लिए जिन्होंने खुद कभी नौकरी नहीं की।
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स्मृति ईरानी ने तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक्टिव रहने वाला कोई भी गंभीर नेता गांव-गांव जाकर लोगों से जुड़ता है, जिसमें काफी समय और मेहनत लगती है। उन्होंने कहा, ऐसे में गंभीर नेता के पास टीवी सीरियल देखने का समय नहीं होता।
उन्होंने आगे कहा कि जो नेता पैतृक सीटों पर राजनीति करते हैं, वे भले ही बड़े दावे करें, लेकिन उनमें किसी दूसरे के मजबूत गढ़ में जाकर जीत हासिल करने का साहस नहीं दिखता। ईरानी ने यह भी कहा कि यदि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष ने रचनात्मक सहयोग दिया होता, तो यह देश के लिए ज्यादा सकारात्मक कदम होता।
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कांग्रेस द्वारा महिला नेतृत्व देने के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि अगर विपक्ष वास्तव में महिला सशक्तिकरण का समर्थक है, तो महिला आरक्षण का विरोध या उस पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संवैधानिक व्यवस्था का समर्थन और स्वागत किया जाना चाहिए।
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स्मृति ईरानी ने इस दौरान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने महिला नेतृत्व को सर्वोच्च पद तक पहुंचाया है, लेकिन विपक्ष का रवैया कई बार सम्मानजनक नहीं रहा।