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घर बिखरने का दर्द : सिंगरौली में अब तक का सबसे बड़ा शहरी विस्थापन शुरू, 50 हजार लोग होंगे विस्थापित

देश की ऊर्जा राजधानी सिंगरौली में सबसे बड़ा विस्थापन शुरू हो गया है। कोल ब्लॉक परिजयोजना के लिए यहां करीब 22 हजार मकानों को जमींदोज किया जाएगा। इससे पूरा मोरवा नगर उजड़ जाएगा।
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सिंगरौली में अब तक का सबसे बड़ा शहरी विस्थापन शुरू, 50 हजार लोग होंगे विस्थापित
सिंगरौली के मोरवा में विस्थापन शुरू हो गया है।

सिंगरौली। देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सिंगरौली में अब तक का सबसे बड़ा शहरी विस्थापन शुरू हो चुका है। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की जयंत परियोजना के विस्तार के लिए मोरवा शहर के करीब 22 हजार मकानों को जमींदोज किया जाएगा। इस ऐतिहासिक कार्रवाई से लगभग 50 हजार लोगों को अपनी सदियों पुरानी पहचान और आशियाना छोड़ना पड़ेगा।

खदान विस्तान नहीं हुआ तो बिजली उत्पादन ठप होगा

NCL प्रशासन का तर्क है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और कोयला आत्मनिर्भरता के लिए यह विस्तार अपरिहार्य है। जयंत खदान से वर्तमान में हर साल 30 मिलियन टन कोयला निकलता है, जिससे देश के कई बड़े ताप विद्युत संयंत्र चलते हैं। अधिकारियों के अनुसार, यदि खदान का विस्तार नहीं हुआ तो बिजली उत्पादन ठप हो सकता है।

2029-30 तक 7 वार्डों को पूरी तरह खाली कराने का लक्ष्य 

विस्थापन की प्रक्रिया फरवरी 2024 से शुरू हो चुकी है और प्रबंधन का लक्ष्य 2029-30 तक मोरवा के 7 वार्डों को पूरी तरह खाली कराने का है। अब तक कई मकानों पर बुलडोजर चल चुका है। इस कार्रवाई से न केवल मकान, बल्कि मोरवा का सामाजिक इतिहास भी मिट जाएगा।

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स्कूल, मंदिर, मस्जिद, चर्च और अस्पताल जद में

क्षेत्र के 30 स्कूल, 25 से अधिक मंदिर, मस्जिद, चर्च और अस्पताल इस विस्तार की जद में हैं। स्थानीय व्यापारियों और मजदूरों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। विस्थापितों की मांग है कि मुआवजे के साथ-साथ एक नए शहर की सामूहिक बसाहट विकसित की जाए, ताकि उनका सामाजिक ताना-बाना सुरक्षित रह सके।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए विस्तार जरूरी

जयंत परियोजना का विस्तार राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। विस्थापितों को मुआवजा देने के लिए पहली बार डिजिटल एलएडीएम पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और रिकॉर्ड आधारित रहे।

रामविजय सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, NCL

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मुआवजा मिलेगा लेकिन रोजगार, यादें कहां मिलेंगी?

हमें मुआवजा तो मिल जाएगा, लेकिन हमारा रोजगार और पीढ़ियों पुरानी यादें कहां मिलेंगी? सरकार को सिर्फ पैसे देने के बजाय हमारे पुनर्वास के लिए एक 'नया मोरवा' शहर योजनाबद्ध तरीके से बसाना चाहिए।

सुरेश शर्मा, स्थानीय निवासी व व्यापारी, मोरवा

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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