सिंगरौली :जर्जर आंगनबाड़ी में पढ़ने को मजबूर मासूम, छत टपक रही, दीवारों में दरारें

सिंगरौली। महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही उजागर हुई है। बरसात में पानी टपकने और बिजली-शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन जर्जर भवन में किया जा रहा है। सिंगरौली जिले में आंगनबाड़ी केंद्र की बदहाल स्थिति बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है।
जिस भवन में छोटे बच्चों की देखभाल और शुरुआती शिक्षा की जिम्मेदारी है, वहीं इमारत अब खतरनाक हालत में पहुंच चुकी है। भवन की छत और दीवारों में गहरी दरारें पड़ गई हैं, कई जगह प्लास्टर झड़ चुका है और बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है। इसके बावजूद मासूम बच्चों और कर्मचारियों को इसी भवन में बैठना पड़ रहा है।
बिजली नहीं, फिर भी आ रहा बिल
ग्रामीणों के मुताबिक, आंगनबाड़ी केंद्र में बिजली का कनेक्शन तक नहीं है, लेकिन हर महीने बिजली का बिल नियमित रूप से पहुंच रहा है। गर्मी के दिनों में बच्चों को बिना पंखे के बैठना पड़ता है। इतना ही नहीं, केंद्र में शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे बच्चों और महिला कर्मचारियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन के पास सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। अगर अतिक्रमण हटाया जाए तो वहां नया और सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन बनाया जा सकता है।
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जरूरत पड़ी तो किराये के भवन में चलेगा केंद्र- विभाग
मामले पर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि विभाग को संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र की जर्जर स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि विभाग समय-समय पर भवनों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव मांगता है। यदि जांच में भवन असुरक्षित पाया जाता है, तो बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केंद्र का संचालन तुरंत किसी किराये के भवन में कराया जाएगा।
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ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- जर्जर भवन की जगह नया भवन बने
ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा भवन बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है। जल्द नया भवन बनाया जाए। - सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटे
लोगों का आरोप है कि आंगनबाड़ी के पास सरकारी जमीन पर कब्जा है। इसे हटाकर केंद्र का विस्तार किया जा सकता है। - बिजली और शौचालय की सुविधा मिले
बच्चों और कर्मचारियों के लिए बिजली, पंखे और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं। - बच्चों की सुरक्षा को मिले प्राथमिकता
बरसात के मौसम में जर्जर भवन में बच्चों को बैठाना जोखिम भरा है। जब तक नया भवन नहीं बनता, केंद्र को सुरक्षित स्थान पर संचालित किया जाए।











