विक्रांत गुप्ता, प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध का असर मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र और बासमती चावल पर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव से समुद्री मार्ग प्रभावित होने से कार्गोशिप के रेट डबल हो गए हैं। वहीं पेट्रो केमिकल्स की सप्लाई न होने से उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। वहीं, कांडला और मुंद्रा पोर्ट से खाड़ी देशों में जाने वाले बासमती चावल के निर्यात में प्रति कंटेनर 2000 डॉलर एक्सट्रा लिए जा रहे हैं।
कंटेनरों की किल्लत के चलते निर्यातकों को न केवल ज्यादा भाड़ा चुकाना पड़ रहा है, बल्कि बंदरगाहों पर माल अटकने से ऑर्डर समय पर पूरे करना भी मुश्किल हो गया है। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र से 30 से अधिक देशों में दवा, ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। अमेरिका और यूरोप समेत 35 से अधिक देशों के स्टील प्लांटों में एचईजी की इलेक्ट्रिक रॉड का उपयोग होता है।
एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विकास मूंदड़ा ने बताया कि युद्ध के कारण समुद्री मार्ग से माल भेजने के लिए कार्गो शिप के रेट दोगुना हो गए हैं। वहीं, पेट्रो केमिकल्स की कमी से उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से जो माल रवाना किया जा चुका है, वह कई बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। कई व्यापारियों को तो ये तक पता नहीं कि उनका माल कहां है।
रायसेन जिले का बासमती चावल ईरान, ईराक, जॉर्डन, कुवैत, दुबई समेत खाड़ी देशों में बड़ी मात्रा में निर्यात होता है। स्थानीय व्यापारी यह चावल एक्सपोर्टरों को उपलब्ध कराते हैं। बरेली के दाल मिल संचालक सचिन वर्मा का कहना है कि अब तो स्थिति सुधर रही है। मिडिल ईस्ट में दुबई और ईराक का पोर्ट खुलने से माल की सप्लाई धीरे-धीरे होना शुरू हो गई है।
सचिन वर्मा का कहना है कि शिपमेंट कंपनियां प्रति कंटेनर 2000 डॉलर एक्सट्रा चार्ज ले रही हैं। इम्पोर्टर और एक्सपोर्टर इस एक्स्ट्रा चार्ज की भरपाई कर रहे हैं। शिपिंग खर्च 2000 डॉलर से बढ़ कर 9000 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुंच गया है।

ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने का असर मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल आइटम के बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। व्यापारियों के अनुसार लोहा और प्लास्टिक महंगा होने से व्हील चेयर, स्ट्रेचर सहित कई सर्जिकल आइटम के दाम करीब 10 से 25 फीसदी तक बढ़ गए हैं। आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है। मालूम हो कि राजधानी में सर्जिकल आयटम की 500 से ज्यादा दुकानें हैं, जिनसे प्रतिदिन पांच से आठ करोड़ रुपए का व्यापार होता है। व्यापारियों का कहना है कि अधिकांश सर्जिकल आइटम में लोहे और प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। कुछ दिनों में कई कंपनियों ने प्रोडक्ट के रेट संशोधित कर दिए हैं, जिससे अस्पतालों और मरीजों को महंगे उपकरण खरीदने पड़ रहे हैं।
इंदौर के सर्जिकल मैन्युफैक्चर दीपक मोदी बताते हैं कि वॉर के चलते कंटेनर कंपनियों ने कंटेनर के किराए में 150 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है। जिस 20 टन के कंटेनर का किराया 1100 डॉलर था, वह 3700 डॉलर तक पहुंच गया है।

मंडीदीप में प्लास्टिक इंडस्ट्री के रोहित जुनेजा बताते हैं कि प्लास्टिक का मुख्य आधार नेफ्था होता है, जो कच्चे तेल का एक बाई-प्रोडक्ट है। खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई कम हो गई है। इसके अलावा, स्ट्रेट आॅफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर संकट मंडराने से मालवाहक जहाजों का किराया और इंश्योरेंस कॉस्ट काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि विदेशों से आने वाला कच्चा माल अब बहुत महंगा हो गया है।

कंपनियों ने सप्लाई रेट बढ़ा दिए हैं, जिससे व्हील चेयर और स्ट्रेचर जैसे उपकरणों की कीमतें करीब 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
यूसुफ अली, लकी सर्जिकल
प्लास्टिक के आयटम के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। प्लास्टिक के छोटे आइटम जैसे वॉटर बॉटल, टिफिन बॉक्स, खिलौने 30 से 150 रुपए तक महंगे मिल रहे है।
नरेश झुरानी, लवी जनरल स्टोर