भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने शताब्दी वर्ष में अपने संविधान में बड़े बदलाव का निर्णय किया है। शताब्दी वर्ष में संघ का नेटवर्क सशक्त बनाने और युवा पीढ़ी को संघ से जोड़ने के लिए व्यवस्था बदल रही है। मध्यप्रदेश में मालवा, महाकोशल और मध्यभारत प्रांत व्यवस्था के स्थान पर अब संभागीय प्रचारक बैठेंगे। राज्य का प्रचारक पूरे प्रदेश की कमान संभालेगा। जिला और ब्लॉक कार्यकर्ता सीधे संभाग से समन्वय रखेंगे। संघ के फैसलों में तेजी लाने के लिए संघ ने देश भर में यह पहल शुरू की है।
संघ की प्रतिनिधि सभा की महत्वपूर्ण बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है। इससे मध्यप्रदेश के 3 प्रांत सहित देश भर के 46 प्रांतों में प्रचारक व्यवस्था बदल जाएगी। अब पूरे प्रदेश की कमान एक प्रचारक और उसके साथ कार्यकारिणी संभालेगी। नई विकेंद्रीकृत व्यवस्था में संभागीय स्तर पर प्रचारकों की संख्या बढ़ जाएगी। देश भर भर में 80 नए संभागों का गठन किए जाने का आकलन किया गया है। संगठन स्तर पर इस बदलाव को सितंबर की बैठक के बाद विजयादशमी के बाद लागू करने की तैयारी है।
मप्र में अभी तक संघ का संगठनात्मक कामकाज मालवा, महाकोशल और मध्यभारत प्रांत की व्यवस्था से बंटा हुआ है। नई व्यवस्था में यह प्रस्ताव भी है कि दो प्रशासनिक मंडलों को मिलाकर एक संभाग का गठन किया जाए। नई व्यवस्था से प्रदेश में करीब आधा दर्जन संभाग गठित हो सकते हैं। इससे संघ के पदाधिकारियों की संख्या बढ़ने के साथ विकेंद्रीकरण और कामकाज में तेजी भी आएगी।
संघ ने इस साल अपने आनुषांगिक संगठनों के अंतर्गत हुए सेवा प्रकल्प और कामकाज की समीक्षा के साथ आगामी कार्ययोजना भी बनाई है। इसमें खासतौर पर संत रविदास के 650वें प्राकट्य दिवस को धूमधाम से मनाया जाएगा। मप्र के सागर जिले में संत रविदास लोक का निर्माण अंतिम चरण में है। पंच परिवर्तन और समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट करने का अभियान शुरू किया जाएगा। गो-संरक्षण के लिए देसी गोबर और गौ-मूत्र की खाद के उपयोग को बढ़ावा देने। घर की छतों पर सब्जी उगाने, जल संरक्षण और पॉलिथीन के कम से कम उपयोग की अपील भी की गई है।