Shankaracharya Interview :धार्मिक व्यवस्था में हस्तक्षेप का अधिकार न सरकार को है न कोर्ट को-शंकराचार्य सदानंद सरस्वती

डॉ. राजीव अग्निहोत्री, जबलपुर। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती धार्मिक के साथ ही सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। वे बचपन से ही सनातन की शिक्षा देने और गो संरक्षण, देसी गोवंश वृद्धि के पक्षधर हैं। हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं में सरकार और न्यायालय के हस्तक्षेप का विरोध करते हैं। हाल ही में जबलपुर के मां बगलामुखी मंदिर स्थित उनके आश्रम में पीपुल्स समाचार ने चर्चा की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...
सवाल : सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए कहा- हिंदुओं को मंदिर जाने की जरूरत नहीं। क्या ऐसी टिप्पणी उचित है?
जवाब : धार्मिक व्यवस्था में हस्तक्षेप का अधिकार न तो सरकार को है, न कोर्ट को। ...और अगर करना ही है तो अन्य धर्मों पर क्यों नहीं करते। हमारे तो सभी बड़े मंदिर शासनाधीन हैं, क्या कोई मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा है? नहीं हैं। करने की हिम्मत भी नहीं है । हमारे मंदिरों का सोना-चांदी सरकार के पास है। सरकार को इन्हें सनातनी कार्यों में खर्च करना चाहिए।
सवाल : वर्तमान समय में हिंदू धर्म के सामने क्या चुनौतियां हैं?
जवाब : आधुनिकता के फेर में युवा पीढ़ी में धार्मिकता की कमी आ रही है। नास्तिक होना आधुनिक माना जाने लगा है। प्रारंभ से ही बच्चों को धर्म की शिक्षा दी जाए। स्कूलों-कॉलेजों में भी ऐसा हो, लेकिन आर्टिकल 30 और 30 ए हिंदुओं को धार्मिक शिक्षा देने से प्रतिबंधित करता है। जबकि मदरसे, मिशनरी और अन्य अल्पसंख्यक स्कूलों में तो उनके धर्म की शिक्षा दी जा रही है, तो हिंदुओं पर ही रोक क्यों?
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सवाल : धर्म परिवर्तन पर क्या कहेंगे?
जवाब : हिंदुओं में धर्म परिवर्तन तेजी से बढ़ रहा है। हम धर्म परिवर्तन करने वालों को राम नाम का जाप करा पुन: हिंदू धर्म से जोड़ रहे हैं। इसे रोकने हमने झारखंड-गुजरात के टांकी जिले में 14 मंदिर बनवाए हैं।
सवाल : आप सेवा कार्य भी करते हैं?
जवाब : हां, यह सब चलता रहता है। जैसे नरसिंहपुर में आश्रम के पास कोई स्कूल दूर-दूर तक नहीं था, वह गुरुजी ने खोला। एक चिकित्सालय है। वहां इलाजों के अलावा मात्र 70 रुपए में आंखों का ऑपरेशन होता है।
सवाल : आजकल चमत्कारी, अपचारी संतों की पूछ बढ़ गई है। क्या इससे हिंदू धर्म को नुकसान है?
जवाब : हो रहा है। लेकिन असली घी, नकली घी की तरह असली-नकली संत की पहचान तो करनी पड़ेगी। असली संत सत्य की तलाश में रहता है, जबकि नकली संत सत्ता की करीबी पाने में। लेकिन अभी भी अच्छे, तपस्वी संत भी बहुत हैं। जो सत्ता और सुख के चक्कर में नहीं पड़ते। नेताओं के चक्कर में वही संत आएंगे जिन्हें अपने आश्रमों में ग्रेनाइट-मार्बल, एसी लगवाना है।
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सवाल : सिंहस्थ आने वाला है, क्या सरकार को कोई सुझाव देंगे?
जवाब : सिंहस्थ को लेकर अखाड़ा परिषद के साथ तीन बार सरकार की बैठकें हो चुकी हैं। हमारे संपर्क में भी मप्र सरकार के लोग हैं। वो सलाह लेने हमारे पास भी आने वाले हैं। हम सुझाव देंगे कि जो अव्यवस्थाएं पूर्व में हुई हैं, इस बार न हों। सब संतों को यथोचित सम्मान दिया जाए। रोड, बिजली, पानी, महात्माओं के कैंप आदि का मास्टर प्लान भी तैयार हो चुका है। मप्र सरकार इस दिशा में अच्छा काम कर रही है।
सवाल : गोसंरक्षण और गंगा पर क्या पर्याप्त काम हो रहा है?
जवाब : गंगा को तो हमारे गुरुदेव ने राष्ट्रीय नदी घोषित कराया था। अब उसको बचाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर काम होना चाहिए। गोमाता की रक्षा होना चाहिए।
सवाल : आपके नए गुरुकुलों में समय अनुरूप क्या पाठ्यक्रम में कोई परिवर्तन होगा, जैसे कंप्यूटर और एआई आदि?
जवाब : हमारे यहां दो तरह के स्कूल है। एक संस्कृत विश्वविद्यालय, जो सरकार से मान्यता प्राप्त हैं। इनमें गणित-विज्ञान सब पढ़ाते हैं। कंप्यूटर भी हैं, लैब भी। दूसरे हैं केवल संस्कृत और वैदिक विद्यालय। यहां कर्मकांड,पूजा पाठ आदि की शिक्षा देते हैं।












