निफ्टी 29 अंक फिसला, सेंसेक्स 70 अंक गिरकर 78,009 पर बंद; टाटा मोटर्स PV में 4.5% की गिरावट

घरेलू शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत के बाद दिनभर उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आखिरकार बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 70 अंक टूटकर 78,009 पर आ गया जबकि निफ्टी 29 अंक गिरकर 24,366 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में आज सबसे ज्यादा चर्चा टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयर की रही। कंपनी के अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी होने के बाद शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली और यह 4.5% गिरकर ₹334 पर बंद हुआ।
टाटा मोटर्स PV के मुनाफे में 80% से ज्यादा की गिरावट
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के लिए अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे कमजोर रहे। कंपनी का मुनाफा 80% से ज्यादा घटकर ₹775 करोड़ रह गया। नतीजे सामने आने के बाद निवेशकों ने शेयर में बिकवाली बढ़ा दी। इसका असर कारोबार के दौरान शेयर की कीमत पर साफ दिखाई दिया और आखिर में यह करीब 4.5% नीचे बंद हुआ।
ये भी पढ़ें: Instagram ने बदली अपनी पहचान, 10 साल पुराना डिजाइन किया OUT! नया Wordmark किया लॉन्च
सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट
शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स ने 78,000 के स्तर के आसपास कारोबार किया। दिन के अंत में यह 70 अंक की गिरावट के साथ 78,009 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी भी दबाव में रहा और 29 अंक गिरकर 24,366 पर आ गया। हालांकि दोनों प्रमुख इंडेक्स में गिरावट सीमित रही और बाजार में किसी बड़ी बिकवाली की स्थिति नहीं बनी।
FII ने 7 दिन में ₹720 करोड़ की खरीदारी की
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII/FPI की गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर रही। पिछले 7 दिनों के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में ₹720 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में FII/FPI ने ₹511 करोड़ की बिकवाली की थी। वहीं पिछले 30 दिनों का आंकड़ा अभी भी ₹2,206 करोड़ की शुद्ध बिकवाली दिखाता है।
ये भी पढ़ें: Motorola का नया Moto G Max 5G लॉन्च, 7000mAh बैटरी के साथ कीमत ₹27,999 से शुरू
DII की खरीदारी बाजार को दे रही सहारा
घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII बाजार में खरीदारी करते नजर आ रहे हैं। पिछले 7 दिनों में DII ने ₹8,929 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की है। पिछले 30 दिनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों की कुल शुद्ध खरीदारी ₹34,726 करोड़ रही। आज भी DII ने करीब ₹4,353 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। इससे पता चलता है कि घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार में लगातार खरीदारी का रुख बनाए हुए हैं।












