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Share Market Today :सेंसेक्स 479 अंक टूटा, निफ्टी 23,914 के नीचे बंद; ग्लोबल तनाव से निवेशकों में चिंता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के असर से भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 479 अंक टूटा जबकि निफ्टी 23,913 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हालांकि मजबूती देखने को मिली।
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सेंसेक्स 479 अंक टूटा, निफ्टी 23,914 के नीचे बंद; ग्लोबल तनाव से निवेशकों में चिंता
सेंसेक्स 479 अंक टूटा जबकि निफ्टी 23,913 पर बंद हुआ

मुंबई। मंगलवार को शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। विदेशों में बढ़ते तनाव और ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। पूरे दिन निवेशक सतर्क नजर आए, जिसके चलते बाजार दबाव में रहा। दिन के आखिर में बीएसई सेंसेक्स 479.26 अंक गिरकर 76,009.70 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 118 अंक टूटकर 23,913.70 के स्तर पर बंद हुआ।

बड़े शेयरों में बिकवाली

दिनभर के कारोबार में कई दिग्गज शेयरों में बिकवाली का माहौल रहा। निफ्टी 50 में अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज, विप्रो और भारती एयरटेल सबसे ज्यादा नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती

मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स कारोबार के दौरान नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा। हालांकि बाजार बंद होते समय इसकी बढ़त सीमित रह गई। स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। बाजार जानकारों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में बना हुआ है, जिसकी वजह से इन शेयरों में खरीदारी जारी रही।

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किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा

सेक्टोरल स्तर पर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में भी दबाव बना रहा। हालांकि दूसरी तरफ मेटल और केमिकल सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। आईटी सेक्टर में भी सीमित मजबूती देखने को मिली, जिससे गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित रही।

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क्या बोले बाजार विशेषज्ञ विनोद नायर

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बाजार में पहले सकारात्मक माहौल बन रहा था, लेकिन दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबर आने के बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया। उन्होंने बताया कि इस घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और रुपये पर भी दबाव बढ़ा। इसके अलावा मासिक एफएंडओ एक्सपायरी के कारण तकनीकी बिकवाली भी तेज हो गई, जिससे बाजार में गिरावट और बढ़ी।

विनोद नायर के अनुसार, भले ही मुख्य सूचकांकों में कमजोरी रही हो, लेकिन मिडकैप इंडेक्स का नए ऑल टाइम हाई तक पहुंचना यह दिखाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी कायम है। उन्होंने कहा कि लगातार डीआईआई निवेश बाजार को सहारा दे रहा है, जबकि एफआईआई की बिकवाली से सेंटीमेंट पर दबाव बना हुआ है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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