इंटरनेश्नल डेस्क। बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट करीब 2.43% की बढ़त के साथ 83.26 डॉलर पर ट्रेड करता दिखा। वहीं वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) में सप्ताह के पहले तीन कारोबारी दिनों में लगभग 11% की मजबूती आई और यह 76 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में यह तेजी फिलहाल तनाव से जुड़ी आशंकाओं के कारण है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.43 प्रतिशत बढ़कर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा है।
तेल कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली सप्लाई पर मंडराता खतरा है। बता दें कि यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। सप्लाई में रुकावट की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टेंशन बढ़ी है और महंगाई के दबाव की चिंता फिर से सिर उठाने लगी है।
तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। जानकारी के अनुसार, अगर कच्चे तेल के दाम में प्रति बैरल 1 डॉलर की बढ़ोतरी होती है तो देश का वार्षिक आयात बिल लगभग 16 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। भारत अपनी जरुरत का करीब आधा तेल मिडिल ईस्ट से, खासकर हॉर्मुज मार्ग के जरिए पूरी करता है। ऐसे में यदि क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और घरेलू महंगाई पर भी पड़ सकता है।