पटना। बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब फिर से राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। अगर यह फैसला अंतिम रूप लेता है तो करीब दो दशक बाद उनकी दिल्ली की राजनीति में वापसी होगी और बिहार में नेतृत्व का नया दौर शुरू हो सकता है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। इसे बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। लगभग 20 साल बाद वे फिर से केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। उनके राज्यसभा पहुंचने पर लंबे समय से चली आ रही उनकी मुख्यमंत्री की पारी समाप्त होगी।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में बिहार में नेतृत्व परिवर्तन तय माना जा रहा है। करीब 21 साल बाद राज्य की सत्ता किसी नए चेहरे के हाथों में जा सकती है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि पहली बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है। यह बदलाव राज्य की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
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नए मुख्यमंत्री की दौड़ में कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का नाम फिलहाल सबसे आगे बताया जा रहा है। वे यादव समुदाय से आते हैं और चुनावी रणनीति में उनकी अहम भूमिका रही है। इसके अलावा बिहार भाजपा के बड़े चेहरे सम्राट चौधरी का नाम भी चर्चा में है। राजनीतिक हलकों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी अति-पिछड़े वर्ग की किसी महिला नेता को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका सकती है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के साथ ही उनके बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार उन्हें जेडीयू कोटे से एमएलसी बनाया जा सकता है और नई सरकार में डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें नीतीश कुमार का राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी में है। इस खबर के बाद जेडीयू कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल के नेता शक्ति सिंह यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को दबाव बनाकर राज्यसभा भेजा जा रहा है और उनसे पद छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनके मुताबिक जेडीयू के अंदर भी इस फैसले को लेकर असंतोष है। शक्ति यादव ने इसे महाराष्ट्र मॉडल का नया वर्जन बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार जब चाहें राज्यसभा जा सकते थे, लेकिन जिस तरह से यह सब हो रहा है वह राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करता है।