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1 लाख कर्मचारियों को बड़ा झटका:वेतन कटौती केस में सुप्रीम कोर्ट जाएगी मोहन सरकार, ₹400 करोड़ एरियर पर संकट

मध्य प्रदेश के करीब एक लाख सरकारी कर्मचारियों से जुड़े वेतन कटौती मामले में नया मोड़ आ गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य की मोहन सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। अगर सरकार शीर्ष अदालत में अपील करती है तो कर्मचारियों को मिलने वाले लगभग 400 करोड़ रुपये के एरियर पर फिलहाल अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
वेतन कटौती केस में सुप्रीम कोर्ट जाएगी मोहन सरकार, ₹400 करोड़ एरियर पर संकट
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्य प्रदेश के करीब एक लाख सरकारी कर्मचारियों से जुड़े वेतन कटौती मामले में नया मोड़ आ गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य की मोहन सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। अगर सरकार शीर्ष अदालत में अपील करती है तो कर्मचारियों को मिलने वाले लगभग 400 करोड़ रुपये के एरियर पर फिलहाल अनिश्चितता पैदा हो सकती है। हाल ही में हाईकोर्ट ने कमलनाथ सरकार के समय लागू किए गए प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती के नियम को अवैध और भेदभावपूर्ण करार दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि जिन कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई है उन्हें एरियर सहित पूरी राशि लौटाई जाए।

    हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया वेतन कटौती का नियम

    कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रोबेशन पीरियड में कर्मचारियों से पूरा काम लिया जा रहा है तो उन्हें पूरा वेतन भी मिलना चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि राज्य सरकार का नियम भेदभावपूर्ण था क्योंकि एक ही पद पर नियुक्त कर्मचारियों के लिए अलग-अलग सेवा शर्तें लागू की गई थीं। दरअसल 12 दिसंबर 2019 के परिपत्र में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) से भर्ती कर्मचारियों और कर्मचारी चयन मंडल से चयनित कर्मचारियों के लिए अलग नियम बनाए गए थे।

    • MPPSC से भर्ती कर्मचारियों का प्रोबेशन पीरियड 2 साल था और उन्हें शुरुआत से 100 प्रतिशत वेतन मिलता था।
    • कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती कर्मचारियों को 4 साल का प्रोबेशन और कटौती वाला वेतन दिया जा रहा था।

    हाईकोर्ट ने इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए इस नियम को निरस्त कर दिया।

    कर्मचारियों ने क्यों खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा

    कमलनाथ सरकार के समय लागू किए गए इस नियम का कर्मचारियों ने लगातार विरोध किया था। बाद में जब शिवराज सिंह चौहान फिर से मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने सार्वजनिक मंचों से यह घोषणा की थी कि प्रोबेशन अवधि चार साल से घटाकर दो साल कर दी जाएगी और वेतन कटौती खत्म की जाएगी। हालांकि यह घोषणा लागू नहीं हो सकी और कर्मचारियों को पुराने नियम के तहत ही काम करना पड़ रहा था। लगातार आर्थिक नुकसान और सरकार के वादे पूरे न होने के कारण कर्मचारियों ने अंततः न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

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    विभागों में भी असमंजस की स्थिति

    इस मामले को लेकर सरकार के अलग-अलग विभागों में भी स्पष्टता नहीं दिख रही है। जब इस फैसले को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे वित्त विभाग का मामला बताया। वहीं वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा कि यह विषय सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ा है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार कब और किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करती है, क्योंकि इससे प्रदेश के करीब एक लाख कर्मचारियों के भविष्य और उनके एरियर भुगतान पर सीधा असर पड़ सकता है। 

    Dr. Sumit  Shrivastava
    By Dr. Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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