
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। एक दिन पहले पार्टी की बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने की थी। उस बैठक में नाम तय नहीं हो पाया था, लेकिन अब श्रवण कुमार के नाम पर आधिकारिक मुहर लग गई है।
बिहार विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी पत्र में इस फैसले की पुष्टि की गई है। पत्र के मुताबिक, 21 अप्रैल 2026 को हुई प्रक्रिया के बाद श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता चुना गया। यह जानकारी विधानसभा अध्यक्ष को भी भेजी गई और फिर औपचारिक रूप से सभी संबंधित विभागों को सूचित किया गया।
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद नहीं मिलने से श्रवण कुमार नाराज बताए जा रहे थे। पहले उनकी नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें वाई प्लस सुरक्षा दी गई थी। अब विधायक दल का नेता बनाकर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ एक पद देने का नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति है। जदयू की राजनीति ‘लव-कुश समीकरण’ पर आधारित मानी जाती है। श्रवण कुमार कुर्मी समुदाय से आते हैं, जो इस समीकरण का अहम हिस्सा है।
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उम्मीद थी कि कुर्मी समाज से किसी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पार्टी ने विजय चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव) को उपमुख्यमंत्री बनाया। ऐसे में अब श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाकर सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
इस फैसले को आने वाले समय के लिए जदयू की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी अलग-अलग वर्गों और जातियों को साधकर अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।