सीहोर में मवेशियों की मौत से हड़कंप: पुलिस लाइन के सामने 8 भेड़ें मरीं, दूषित पानी की आशंका से जांच तेज
सीहोर। शहर में पुलिस लाइन मैदान के सामने मवेशियों की अचानक मौत का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया। राजस्थान से आए एक पशुपालक की आठ भेड़ों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी पीने के कुछ समय बाद भेड़ों की हालत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते पशुपालक को भारी नुकसान उठाना पड़ा। घटना के बाद दूषित पानी की आशंका जताई जा रही है, लेकिन मौत की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है। अब जांच रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
पानी पीने के बाद बिगड़ी हालत
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे पुलिस लाइन मैदान के सामने भेड़ों की तबीयत अचानक बिगड़ने की सूचना सामने आई। बताया गया कि मवेशियों को अनाज मंडी की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान पानी पीने के बाद कुछ पशुओं की हालत खराब होने लगी। घटना की जानकारी फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और पशुओं की अचानक मौत को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताई जाने लगीं।
राजस्थान के जालौर का रहने वाला है पशुपालक
जानकारी के मुताबिक, पशुपालक पोइया राजस्थान के जालौर जिले का निवासी है। वह अपनी भेड़ों के साथ सीहोर क्षेत्र में रहकर आजीविका चला रहा था। उसके पास लगभग 225 से 250 भेड़ें बताई गई हैं। इनमें से आठ भेड़ों की मौत ने उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। पशुपालन ही आजीविका का साधन होने के कारण इस नुकसान से पशुपालक परेशान है।
पुलिस, पशु चिकित्सक और पीएचई विभाग की टीम पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही मंडी थाना पुलिस, पशु चिकित्सा विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टर अक्षय कुमार मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों की प्राथमिकता भेड़ों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाना है। पानी की गुणवत्ता समेत घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
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पोस्टमार्टम और सैंपल जांच से खुलेगा मौत का राज
प्रारंभिक तौर पर दूषित पानी पीने की आशंका व्यक्त की गई है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले इसे मौत का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। जानकारी के अनुसार, दो भेड़ों का पोस्टमार्टम कराए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही आवश्यक सैंपल लेकर जांच की जा रही है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि भेड़ों की मौत किसी विषैले या दूषित पदार्थ, पानी की गुणवत्ता अथवा किसी अन्य कारण से हुई।
आर्थिक मदद की मांग, प्रशासन से राहत की उम्मीद
घटना के बाद पशुपालक और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि भेड़ों की मौत से पशुपालक को नुकसान हुआ है और उसे राहत मिलनी चाहिए। हालांकि आर्थिक सहायता को लेकर प्रशासन की ओर से किसी निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
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जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
सीहोर में हुई इस घटना ने पशुओं की सुरक्षा और पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरी है कि जांच निष्पक्षता और तेजी से पूरी हो, मौत की वजह स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए। फिलहाल, आठ भेड़ों की मौत का रहस्य जांच रिपोर्ट के बाद ही सुलझ सकेगा।






















