सीहोर में नई पानी की टंकी के पहले ट्रायल में रिसाव, क्षमता से अधिक पानी भरने के आरोप से उठे सवाल

सीहोर। गंज क्षेत्र के आठ वार्डों की प्यास बुझाने के लिए बनाई गई नई पानी की टंकी का ट्रायल पहले ही दिन विवादों में घिर गया। धन क्षेत्र की टंकी का शुभारंभ 20 जून को हुआ था। गंज दशहरा मैदान के समीप अमृत-2 योजना के तहत निर्मित टंकी में शनिवार को पानी भरते ही कई जगह से रिसाव होने लगा। जिस टंकी से क्षेत्रवासियों को नियमित जलापूर्ति और पर्याप्त प्रेशर मिलने की उम्मीद थी, उसी के शुरुआती परीक्षण में पानी बहने से निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला तब और गंभीर हो गया, जब कांग्रेस नेता रामप्रकाश चौधरी ने 13 लाख लीटर की डिजाइन क्षमता वाली टंकी में 16 लाख लीटर पानी भरे जाने का आरोप लगाते हुए संभावित खतरे और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।
पहली बार पानी भरा, कई जगह से रिसाव शुरू
गंज दशहरा मैदान के समीप बनी टंकी में शनिवार को पानी भरकर परीक्षण किया जा रहा था। इसी दौरान टंकी से जगह-जगह पानी निकलने लगा। मौके पर मौजूद लोगों ने रिसाव देखकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद थी कि टंकी चालू होने से गंज क्षेत्र के आठ वार्डों में पेयजल व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन शुरुआती ट्रायल में सामने आई स्थिति ने उनकी चिंता बढ़ा दी। सवाल यह है कि यदि परीक्षण के दौरान ही खामियां सामने आ रही हैं, तो नियमित संचालन शुरू होने से पहले इनकी तकनीकी जांच कितनी गंभीरता से की गई थी?
कांग्रेस नेता ने उठाया क्षमता और सुरक्षा का सवाल
कांग्रेस नेता रामप्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि टंकी की डिजाइन क्षमता 13 लाख लीटर होने के बावजूद उसमें कथित तौर पर 16 लाख लीटर पानी भरा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निर्धारित क्षमता से अधिक पानी भरने के कारण संरचना को नुकसान पहुंचता या टंकी गिरने जैसी गंभीर घटना हो जाती, तो जनहानि की जिम्मेदारी कौन लेता? उन्होंने ठेकेदार और नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की। उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है लेकिन क्षमता और वास्तविक भराव को लेकर उठे सवालों का तकनीकी दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट जवाब दिया जाना जरूरी है।
सहायक यंत्री बोले-ऑपरेटरों के समन्वय में हुई चूक
नगर पालिका के सहायक यंत्री विजय कोली ने रिसाव की वजह ऑपरेटरों के बीच समन्वय की कमी को बताया। उनके अनुसार, टंकी में जरूरत से ज्यादा पानी भर जाने के कारण ओवरफ्लो हुआ और हल्का रिसाव भी सामने आया। उन्होंने बताया कि टंकी की डिजाइन क्षमता 13 लाख लीटर है, जबकि संरचना में इससे अधिक पानी भरने की गुंजाइश होने का दावा भी किया। कोली ने कहा कि टंकी का स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन किया गया है कि अतिरिक्त भराव से कोई खतरा नहीं है। हालांकि इस दावे की पुष्टि के लिए स्वीकृत डिजाइन, संरचनात्मक गणना और तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगी।
सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर 10 दिन में सुधार नहीं तो चक्काजाम, सड़क और बिजली की समस्या से परेशान ग्रामीण
'हल्का सीपेज सामान्य', मरम्मत कराने का दावा
सहायक यंत्री विजय कोली ने रिसाव को बड़ा तकनीकी संकट मानने से इनकार करते हुए कहा कि नई टंकियों में शुरुआती दौर में हल्का सीपेज हो सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नगर पालिका की ओर से मरम्मत कराई जा रही है और रिसाव बंद हो जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रिसाव केवल अधिक भराव के कारण हुआ या निर्माण के दौरान कंक्रीट, वॉटरप्रूफिंग अथवा अन्य तकनीकी मानकों में भी कोई कमी रही? इसका जवाब केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि विशेषज्ञों की जांच और परीक्षण रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा।
नेता प्रतिपक्ष ने भी उठाए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष विवेक राठौर, कांग्रेस नेता राम प्रकाश चौधरी ने भी टंकी के रिसाव को लेकर विरोध जताया और निर्माण कार्य में अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर टंकी की स्थिति पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की। हालांकि, भ्रष्टाचार अथवा निर्माण में अनियमितता के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में नगर पालिका को चाहिए कि आरोपों को केवल राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज करने के बजाय तथ्य सार्वजनिक करे।
सीहोर में सीवन नदी के पानी से सिंचाई कर रहे पांच किसानों की मोटरें नगर पालिका ने जब्त कीं
आठ वार्डों की उम्मीदों के बीच अब जांच की मांग
गंज क्षेत्र के लोगों के लिए यह टंकी सिर्फ निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि बेहतर पेयजल व्यवस्था की उम्मीद है। ऐसे में शुरुआती परीक्षण में सामने आए रिसाव को मामूली बताकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। नगर पालिका को टंकी की स्वीकृत डिजाइन क्षमता, वास्तविक जलभराव, निर्माण गुणवत्ता और रिसाव के कारणों की तकनीकी जांच करानी चाहिए।




















