दूसरों की तरक्की से क्यों जलता है मन? ज्ञानवर्धन स्वामी ने बताया ईर्ष्या से मुक्ति और शांति का रास्ता

सीहोर। भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा से भरे आधुनिक जीवन में मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के बावजूद भीतर से अशांत होता जा रहा है। इस अशांति की जड़ आखिर क्या है? स्वामीनारायण मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक परायण के अंतिम दिन ज्ञानवर्धन स्वामी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में व्याप्त अशांति का बड़ा कारण ईर्ष्या है। यदि व्यक्ति दूसरों की उन्नति देखकर जलने के बजाय अपने जीवन में संतोष और सरलता को स्थान दे, तो मन शांति से भर सकता है।
दूसरों की तरक्की नहीं, ईर्ष्या छीन रही मन की शांति
ज्ञानवर्धन स्वामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज व्यक्ति अपनी सुख-सुविधाओं की कमी से उतना परेशान नहीं है, जितना दूसरों की उन्नति देखकर ईर्ष्या से घिर जाता है। यही भाव धीरे-धीरे मन की शांति को खत्म कर मानसिक तनाव और बेचैनी का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि ईर्ष्या मनुष्य को भीतर से कमजोर करती है और उसे अपने सुख को देखने के बजाय दूसरों के जीवन से तुलना करने के लिए मजबूर करती है।
संतों का सानिध्य दिखाता है शांति का रास्ता
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि मन से ईर्ष्या जैसे नकारात्मक भाव को दूर करने का सहज और सच्चा मार्ग संत-महात्माओं का सानिध्य और सत्संग है। जब मनुष्य संतों के विचारों को सुनकर उन्हें अपने आचरण में उतारता है, तो उसके भीतर सकारात्मक सोच विकसित होती है। सरल जीवन और संतोष का भाव अपनाने से मनुष्य बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना आत्मिक शांति की ओर बढ़ सकता है।
सत्संग से जुड़कर जीवन बनता है मंगलमय
कार्यक्रम का संचालन करते हुए विनय स्वामी एवं विमल स्वामी दासजी ने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और सच्ची शांति प्राप्त करना भी है। उन्होंने कहा कि प्रभु भक्ति और सत्संग मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ते हैं। नियमित रूप से सत्संग से जुड़ने वाला व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मकता, संयम और सेवा की भावना को मजबूत कर सकता है।
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आस्था और भक्ति से सराबोर हुआ मंदिर परिसर
तीन दिवसीय आध्यात्मिक परायण के अंतिम दिन स्वामीनारायण मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। अंतिम दिवस के प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ज्ञानवर्धन स्वामी के विचार सुने और ईर्ष्या से दूर रहकर संतोष, सरलता तथा सत्संग को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश ग्रहण किया।
महाआरती के साथ हुआ आध्यात्मिक आयोजन का समापन
तीन दिवसीय परायण के समापन अवसर पर भगवान स्वामीनारायण की विधिवत महाआरती उतारी गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को महाप्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन में दक्षेश पटेल, जयसिंह, इमरतसिंह राजा, अशोक पटेल, डॉ. अशोक पिचोनिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक सोच, संतोष और आत्मिक शांति अपनाने का संदेश दिया।



















