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भगवान बनकर आई पुलिस: भैरूंदा में भीड़ के बीच बिछड़ी 7 साल की बच्ची, डायल-112 ने परिवार से मिलाया

सीहोर के भैरूंदा में जेपी मार्केट की भीड़ में माता-पिता से बिछुड़ी 7 वर्षीय बच्ची को डायल-112 की टीम ने सुरक्षित परिवार से मिलाया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची से प्यार व धैर्य से जानकारी लेकर ग्राम नयापुरा पहुंची। पुलिस की तत्परता से बच्ची सकुशल परिजनों तक पहुंची और परिवार की खुशियां लौट आईं।
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भगवान बनकर आई पुलिस: भैरूंदा में भीड़ के बीच बिछड़ी 7 साल की बच्ची, डायल-112 ने परिवार से मिलाया
भीड़ में माता-पिता से बिछड़ी मासूम

सीहोर। कभी-कभी पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली ही नहीं करती, बल्कि किसी परिवार की खुशियां भी लौटाती है। सीहोर जिले के भैरूंदा क्षेत्र में ऐसा ही भावुक पल देखने को मिला, जब जेपी मार्केट की भीड़ में अपने माता-पिता से बिछुड़ी सात वर्षीय मासूम को डायल-112 की सतर्क और संवेदनशील टीम ने सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचा दिया। पुलिस की तत्परता ने न सिर्फ एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया, बल्कि एक चिंतित परिवार के चेहरे पर फिर से मुस्कान भी लौटा दी।

भीड़ में बिछुड़ी मासूम, कंट्रोल रूम को मिली सूचना

बुधवार 6 अगस्त की रात करीब 9:32 बजे राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना मिली कि जेपी मार्केट में लगभग सात वर्षीय एक बालिका अकेली घूम रही है। बच्ची बेहद घबराई हुई थी और उसे अपने घर का रास्ता भी याद नहीं था। सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए भैरूंदा थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया।

पुलिस ने स्नेह और धैर्य से जीता बच्ची का भरोसा

मौके पर पहुंचे डायल-112 के आरक्षक जितेंद्र कीर और पायलट नरेंद्र सोलंकी ने सबसे पहले बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया। घबराई हुई मासूम से उन्होंने बेहद अपनत्व, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ बातचीत की। पुलिस के भरोसेमंद व्यवहार के बाद बच्ची ने बताया कि वह ग्राम नयापुरा की रहने वाली है और अपने परिजनों के साथ बाजार आई थी, लेकिन भीड़ में उनसे बिछड़ गई।

सूझबूझ से मिली सफलता, गांव पहुंचकर खोजे परिजन

बालिका से मिली जानकारी के आधार पर डायल-112 टीम उसे अपने वाहन से ग्राम नयापुरा लेकर पहुंची। वहां स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई और आसपास तलाश शुरू की गई। कुछ ही समय में बच्ची के परिजनों का पता चल गया। आवश्यक पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने बच्ची को सुरक्षित उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया।

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मासूम को देखकर छलक पड़े खुशी के आंसू

अपनी बेटी के अचानक लापता हो जाने से परिवार गहरे तनाव में था। जैसे ही मासूम सुरक्षित उनके सामने पहुंची, माता-पिता की आंखों में राहत और खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने डायल-112 पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई, संवेदनशील व्यवहार और मानवीय सोच के लिए दिल से आभार व्यक्त किया।

स्थानीय लोगों ने कहा..यही है जनसेवा की असली तस्वीर

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद लोगों ने भी पुलिस की कार्यशैली की खुलकर सराहना की। लोगों का कहना था कि समय रहते पुलिस ने जिस तरह सक्रियता दिखाई, उससे एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना साबित करती है कि संवेदनशील पुलिसिंग समाज में भरोसा और सुरक्षा की भावना को और मजबूत बनाती है।

मानवीय पुलिसिंग का प्रेरक उदाहरण

यह घटना केवल एक बच्ची को उसके परिवार से मिलाने भर की कहानी नहीं है। यह उस मानवीय चेहरे की मिसाल है जो पुलिस की वर्दी के पीछे छिपा होता है। डायल-112 की तत्परता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी ने एक परिवार को उसकी सबसे अनमोल खुशी वापस लौटा दी। ऐसे प्रयास लोगों का पुलिस पर विश्वास बढ़ाते हैं। इसके साथ ही यह संदेश भी देते हैं कि संकट की हर घड़ी में संवेदनशील और सजग पुलिस समाज की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

पत्रकारिता मेरे लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ को सच और संवेदनशीलता के साथ उठाने का संकल्प ...Read More

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