SBI Mutual Fund के संभावित IPO को लेकर बाजार में काफी उत्साह है, हालांकि कंपनी अभी तक लिस्ट नहीं हुई है। इसके बावजूद इसके अनलिस्टेड शेयर ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 की दूसरी छमाही में कंपनी शेयर बाजार में एंट्री कर सकती है। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे अभी जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय IPO का इंतजार करें और उस समय कंपनी की वैल्यूएशन और फंडामेंटल्स को ध्यान में रखकर ही फैसला लें।
SBI Mutual Fund, देश के सबसे बड़े बैंक SBI और फ्रांस की कंपनी Amundi का संयुक्त उद्योग है। यह भारत की प्रमुख म्यूचुअल फंड कंपनियों में से एक है।इसकी मजबूत बैकिंग और व्यापक नेटवर्क इसे बाजार में एक मजबूत स्थिति देता है, कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी लगभग 12,000 से 12,500 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इससे इसका वैल्यूएशन करीब 13 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सबसे खास बात यह है कि इस आईपीओ में कोई नए शेयर जारी नहीं होंगे। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा।
SBI Mutual Fund के शेयर फिलहाल अनलिस्टेड मार्केट में करीब 750 से 775 रुपये प्रति शेयर के बीच ट्रेड कर रहे हैं। इस आधार पर कंपनी का अनुमानित मार्केट कैप 1.52 लाख करोड़ से 1.57 लाख करोड़ रुपये के बीच माना जा रहा है। तीन साल पहले इसकी कीमत करीब 245 से 250 रुपये थी, जो अब लगभग तीन गुना हो चुकी है। इस तरह, इसने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है और यही वजह है कि इसका आईपीओ काफी चर्चाओं में है।
पिछले एक साल में भी इस शेयर ने करीब 20 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। हालांकि हाल के महीनों में इसकी कीमतें थोड़ी स्थिर रही हैं, लेकिन निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है। अनलिस्टेड मार्केट में इसकी तेजी का मुख्य कारण इसकी सीमित उपलब्धता और ज्यादा मांग है। जब शेयर कम होते हैं और खरीददार ज्यादा, तो कीमत बढ़ना स्वाभाविक होता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, SBI Mutual Fund 2026 की दूसरी छमाही में शेयर बाजार में लिस्ट हो सकता है। कंपनी ने मार्च 2026 में सेबी के पास अपना DRHP भी जमा कर दिया है। इससे यह साफ होता है कि कंपनी आईपीओ की तैयारी कर रही है और जल्द ही निवेशकों को इसमें भाग लेने का मौका मिल सकता है।
कंपनी के वित्तीय आंकड़े मजबूत हैं। 31 मार्च 2025 को समाप्त नौ महीनों में कंपनी ने करीब 234.3 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। वहीं, इसका ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब 3,883.24 करोड़ रुपये रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का बिजनेस स्थिर और ग्रोथ की दिशा में है, जो आईपीओ के लिए अच्छे संकेत है।
18 दिसंबर 2025 को कंपनी के शेयर 3:1 अनुपात के आधार पर बिना बोनस के ट्रेड कर रहे थे। यह दिखाता है कि कंपनी अपने शेयर स्ट्रक्चर को संतुलित तरीके से मैनेज कर रही है। इस तरह के फैसले निवेशकों के भरोसे को मजबूत करते हैं और कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाते हैं।
लिस्टिंग के बाद SBI Mutual Fund का मुकाबला HDFC AMC और ICICI Prudential AMC जैसी बड़ी कंपनियों से होगा।हालांकि, मौजूदा समय में इसका वैल्यूएशन इन कंपनियों से ज्यादा बताया जा रहा है, जो निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बात है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनलिस्टेड मार्केट में इसकी तेजी का मुख्य कारण डिमांड और सप्लाई का असंतुलन है। इसके शेयर कम उपलब्ध हैं, जबकि निवेशकों की मांग ज्यादा है। इसके अलावा, कंपनी की मजबूत ब्रांड वैल्यू और भरोसेमंद पृष्ठभूमि भी इसकी लोकप्रियता बढ़ा रही है।
आईपीओ में कंपनी के दोनों प्रमोटर SBI और Amundi अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। कुल मिलाकर करीब 20.37 करोड़ शेयर यानी लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी। इसमें SBI करीब 6.3 प्रतिशत और Amundi बाकी हिस्सेदारी बेचेंगे।
यह आईपीओ निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका हो सकता है, खासकर लंबे समय के निवेशकों के लिए। हालांकि, इसका ऊंचा वैल्यूएशन एक जोखिम भी हो सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले कंपनी की पूरी जानकारी और बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है।
SBI Mutual Fund का आईपीओ बाजार में एक बड़ा इवेंट बन सकता है। अनलिस्टेड मार्केट में इसके शानदार प्रदर्शन ने पहले ही निवेशकों का भरोसा जीत लिया है।अब सभी की नजर इसकी लिस्टिंग पर है। सही रणनीति के साथ निवेश करने पर यह एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है।