मिडिल ईस्ट एक बार फिर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के केंद्र में आ गया है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) की सबसे अहम रिफाइनरियों में से एक रास तनुरा (Ras Tanura) पर ड्रोन हमला होने से पूरी दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र पर टिक गई हैं। इस हमले के बाद न सिर्फ रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। यह घटना सिर्फ एक सुरक्षा चुनौती नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर डाल सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित रास तनुरा तेल रिफाइनरी को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया। यह इलाका दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्रों में से एक माना जाता है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, हमले के दौरान एक ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया, लेकिन उसका मलबा रिफाइनरी के प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स के पास गिर गया। मलबा गिरने से इलाके में आग लग गई, जिसके बाद तुरंत आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि, आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया और इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से रिफाइनरी को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया।
रास तनुरा सिर्फ एक रिफाइनरी नहीं बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा है। यह सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित है और इसे दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात टर्मिनलों में गिना जाता है। इस रिफाइनरी की क्षमता लगभग 5.5 लाख बैरल तेल प्रतिदिन बताई जाती है। यहीं से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजे जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर इस तरह की सुविधाएं लंबे समय तक प्रभावित होती हैं, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है।
हमले की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 9 से 9.7 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि, खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे तेल की सप्लाई को प्रभावित करती है। यही वजह है कि बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी से कई देशों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे ईंधन की कीमतों और महंगाई पर असर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का भी जिक्र अहम हो गया है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। हाल के दिनों में कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सीमित करने पर विचार किया है।
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खाड़ी क्षेत्र में हालिया तनाव की पृष्ठभूमि में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता टकराव बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल ने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी।
इस तनाव का असर पूरे मिडिल ईस्ट में दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन जैसे देश भी सतर्क हो गए हैं। अगर यह टकराव और बढ़ता है तो यह सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।
Saudi Aramco को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में गिना जाता है। यह कंपनी रोजाना करीब 10 से 12 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करती है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 1.6 से 1.7 ट्रिलियन डॉलर के आसपास माना जाता है। Saudi Aramco न सिर्फ सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि इस कंपनी की किसी भी सुविधा पर हमला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी खबर बन जाता है।
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ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ती है तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा।
इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं जैसे-
भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है।
इस हमले के बाद सऊदी अरब ने अपने ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि, एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके।
सऊदी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि, देश की तेल आपूर्ति को लंबे समय तक प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।