रियाद। पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों और शहरों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में बेचैनी बढ़ गई है। इस बीच सऊदी अरब ने पहली बार बेहद सख्त शब्दों में ईरान को चेतावनी दी है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने साफ कहा है कि, उनके देश और उसके सहयोगियों की सहनशक्ति अब खत्म होती जा रही है।
उन्होंने संकेत दिया कि, अगर ईरान ने अपने हमले बंद नहीं किए, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इस बयान को मध्य पूर्व की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि खाड़ी देश अब सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं।
रियाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रिंस फैसल ने कहा कि, ईरान को तुरंत अपनी सैन्य रणनीति पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, खाड़ी देशों और सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि, हम साफ करना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है। अगर जरूरत पड़ी तो हम उसका इस्तेमाल करने में बिल्कुल भी हिचकिचाएंगे नहीं।
हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन परिस्थितियों में सऊदी अरब सैन्य कार्रवाई करेगा, लेकिन उनके बयान से साफ हो गया है कि सऊदी अरब अब ईरान की आक्रामकता को ज्यादा समय तक सहन करने के मूड में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब का मुख्य उद्देश्य फिलहाल अपने देश और पड़ोसी खाड़ी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ईरान ने हाल ही में खाड़ी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया। सबसे बड़ा हमला कतर के रास लाफन गैस प्लांट पर हुआ, जिसे दुनिया के सबसे बड़े LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) केंद्रों में गिना जाता है। इस हमले के बाद कतर सरकार ने इसे खुली आक्रामकता बताया और कड़ी प्रतिक्रिया दी।
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हबशन गैस प्लांट को भी निशाना बनाया गया। हमले के बाद वहां गैस ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया।
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स्थान |
हमला |
स्थिति |
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कतर - रास लाफन LNG प्लांट |
मिसाइल हमला |
भारी नुकसान की आशंका |
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UAE - हबशन गैस प्लांट |
ड्रोन व मिसाइल |
ऑपरेशन अस्थायी रूप से रुका |
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सऊदी अरब - रियाद |
4 बैलिस्टिक मिसाइल |
एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट किया |
सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रियाद की ओर दागी गई चार बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
ईरान ने इन हमलों को अपनी रक्षात्मक कार्रवाई बताया है। तेहरान का कहना है कि, यह हमला इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में किया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उस पर हमला हुआ तो खाड़ी देशों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान से जुड़ी एक समाचार एजेंसी के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजरायल ने अपने कदम नहीं रोके तो ऊर्जा ठिकानों पर हमले और तेज किए जा सकते हैं। ईरान ने यह भी कहा कि, उसका अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
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सऊदी विदेश मंत्री ने कहा कि, ईरान की आक्रामकता के खिलाफ अब उनका धैर्य सीमित हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, हमारा धैर्य असीमित नहीं है। ईरान को समझना होगा कि पड़ोसी देशों पर हमला करने का परिणाम क्या हो सकता है।
प्रिंस फैसल ने यह भी कहा कि, ईरान पर अब भरोसा करना बेहद मुश्किल हो गया है। उनके अनुसार इन हमलों की योजना पहले से बनाई गई थी और अब सामने आ रही घटनाएं उसी रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि, पिछले एक दशक से ईरान इस तरह की रणनीति पर काम कर रहा था, जिसमें पड़ोसी देशों पर दबाव बनाकर क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करना शामिल है।
सऊदी विदेश मंत्री का बयान उस समय आया जब रियाद में क्षेत्रीय और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक हो रही थी। इस बैठक के दौरान ही रियाद की ओर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। सऊदी अरब का कहना है कि, इन मिसाइलों का मकसद बैठक में शामिल देशों को डराना और राजनीतिक दबाव बनाना था। हालांकि, सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने इन सभी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। प्रिंस फैसल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, इस तरह की धमकियों से सऊदी अरब डरने वाला नहीं है।
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मध्य पूर्व के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडार का केंद्र है। इसलिए यहां किसी भी बड़े युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहते हैं तो तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
प्रिंस फैसल ने कहा कि, भले ही भविष्य में युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन ईरान के साथ भरोसा बहाल करना बेहद मुश्किल होगा। उनके मुताबिक इन हमलों ने विश्वास की बुनियाद को पूरी तरह हिला दिया है। उन्होंने कहा कि, अगर ईरान तुरंत अपने कदम पीछे नहीं हटाता, तो भविष्य में दोनों पक्षों के रिश्ते सामान्य होना लगभग असंभव हो जाएगा।
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अभी खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। दूसरी ओर ईरान भी संकेत दे चुका है कि वह अपने अभियान को आगे बढ़ा सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन पूरे मध्य पूर्व के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं। अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप भी ले सकता है।