इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जो दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस सुविधा मानी जाती है। इस हमले से बौखलाए ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस फील्ड्स पर जवाबी हमले किए हैं। जिसके बाद तेल और गैस की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली। साउथ पार्स गैस फील्ड ईरान के दक्षिणी बुशहर प्रांत के तट के पास स्थित है। यह क्षेत्र न केवल ईरान की घरेलू गैस जरूरतों को पूरा करता है बल्कि कतर के साथ मिलकर दुनिया में गैस निर्यात का महत्वपूर्ण केंद्र भी है।
हमले के तुरंत बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब, UAE और कुवैत में ऊर्जा सुविधाओं पर हमले की धमकी दी और जवाबी हमला किया।
कतर: रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में ईरानी मिसाइल हमले से भारी नुकसान हुआ। कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने कहा कि, आग पर काबू पाने के लिए आपातकालीन टीम तैनात की गई। कोई हताहत की खबर नहीं है, लेकिन उत्पादन प्रभावित हुआ।
सऊदी अरब: राजधानी रियाद में चार बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। मिसाइलों का हमला शहर के अलग-अलग हिस्सों में गिरा, जिसमें चार लोग घायल हुए।
UAE और कुवैत: ईरान ने अल होसन गैस फील्ड और अन्य पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाने की चेतावनी दी।
कतर ने ईरानी दूतावास के सभी मिलिट्री और सिक्योरिटी अटैची समेत कर्मचारियों को 24 घंटे में देश छोड़ने को कहा और उन्हें पर्सोना नॉन ग्रांटा घोषित किया।
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच तेल संकट: रूस का पाकिस्तान को सस्ते तेल का ऑफर
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि, साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है। उन्होंने गंभीर परिणामों की चेतावनी दी।
इजरायल ने इस हमले के दौरान ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को भी मार गिराया। इससे पहले इजरायल ने अली लारीजानी और जनरल गुलाम रजा सुलेमानी को भी निशाना बनाया था। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने कहा कि आने वाले समय में और बड़े आश्चर्य होने वाले हैं।
साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात प्राकृतिक गैस भंडार है। यहाँ ईरान की 75% घरेलू गैस उत्पादन होती है। कतर के हिस्से से बड़े पैमाने पर LNG (Liquefied Natural Gas) निर्यात किया जाता है। फील्ड का हिस्सा नॉर्थ डोम–साउथ पार्स रिजर्वायर है। इस फील्ड पर हमले का असर न केवल ईरान और खाड़ी देशों में होगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी देखने को मिलेगा।
[featured type="Featured"]
हमले के बाद तेल और गैस की कीमतों में तेज वृद्धि हुई। कच्चे तेल का दाम बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 109.91 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जो मंगलवार से 5% अधिक है। ब्रिटेन का बेंचमार्क गैस प्राइस 6% बढ़कर 143.53 पेंस प्रति थर्म तक पहुंचा, हालांकि बाद में यह 140 पेंस से नीचे आ गया। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी गैस की तुलना में तेज है, क्योंकि बाजार भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई रिस्क को प्राथमिकता दे रहा है।
भारत में तेल-गैस संकट और महंगाई बढ़ सकती है क्योंकि, भारत LNG का 1.4 करोड़ टन सालाना आयात करता है। LPG का 80-85% गल्फ देशों (कतर, सऊदी आदि) से आता है। कतर की रास लफान और मेसाईड गैस सुविधाओं पर हमले के बाद भारत की गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है। अगर ईरान या खाड़ी देशों में हमले बढ़ते हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडरों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। सप्लाई चेन में बाधा और उत्पादन में कमी भारत समेत दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित करेगी।
साउथ पार्स पर हमले से पहले से ही एनर्जी संकट में फंसी दुनिया की चिंताएं बढ़ गई हैं। यहां हर साल अरबों क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन होता है। इस क्षेत्र से वैश्विक LNG सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा आता है। बिजली ग्रिड को 80% गैस इसी फील्ड से मिलती है, इसलिए बिजली संकट की संभावना भी बढ़ गई है।
वैश्विक व्यापारियों और निवेशकों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और तेल-गैस कीमतों में तेजी देखी गई। यदि खाड़ी देशों में सुरक्षा हालात स्थिर नहीं होते हैं, तो आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय गैस और तेल सप्लाई और प्रभावित हो सकती है।