वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार साउथ पार्स गैस फील्ड पर टिक गई हैं। इजरायल के हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि, अब इजरायल इस गैस फील्ड पर और हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर ईरान ने कतर के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया तो अमेरिका बेहद कड़ी कार्रवाई करेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का आज 20वां दिन है और ऊर्जा बाजार से लेकर वैश्विक राजनीति तक इस संघर्ष का असर दिखाई दे रहा है।
28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। इसी कड़ी में बुधवार को इजरायल ने पहली बार ईरान के सबसे अहम ऊर्जा केंद्र साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया।
यह गैस फील्ड ईरान और कतर की सीमा पर फैला हुआ है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली हमले में गैस फील्ड के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा और वहां कई घंटों तक आग धधकती रही। हमले के बाद पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल मच गई।
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इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि, मिडिल ईस्ट में हाल की घटनाओं से नाराज होकर इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया। हालांकि इसमें फील्ड के केवल एक छोटे हिस्से को ही निशाना बनाया गया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि, अमेरिका को इस हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ कहा कि, अब इजरायल इस गैस फील्ड पर और हमले नहीं करेगा।
ट्रंप ने अपने बयान में कतर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, कतर का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं था और उसे इस ऑपरेशन की जानकारी भी नहीं थी। लेकिन ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर ईरान ने कतर के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया या वहां की LNG सुविधाओं पर हमला किया तो अमेरिका बेहद कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने यहां तक कहा कि, अगर ऐसी स्थिति बनी तो अमेरिका, इजरायल की मदद से या उसके बिना भी साउथ पार्स गैस फील्ड को पूरी ताकत से नष्ट कर सकता है।
इजरायल के हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर के Ras Laffan Industrial City में स्थित LNG प्लांट को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि, ईरान ने वहां कई मिसाइलें दागीं, जिससे LNG प्लांट को नुकसान पहुंचा। कतर सरकार ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान को यह गलतफहमी हो गई थी कि कतर इस हमले में शामिल था। उन्होंने इसे अनुचित और गलत प्रतिक्रिया बताया।
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश था। विश्लेषकों का मानना है कि इस हमले के जरिए इजरायल और अमेरिका ने ईरान को यह संदेश देने की कोशिश की है कि, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करना भारी पड़ सकता है। ऊर्जा मार्गों पर नियंत्रण की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह इस ऑपरेशन में सीधे शामिल नहीं था।
साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक है। इसकी अहमियत कई वजहों से बेहद ज्यादा है-
अगर इस गैस फील्ड को बड़ा नुकसान होता है तो इसका असर केवल ईरान ही नहीं बल्कि पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
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ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर साउथ पार्स गैस फील्ड पर लगातार हमले होते रहे तो LNG की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है। गैस और तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, एशिया और यूरोप के ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इसी वजह से अमेरिका और कई खाड़ी देशों ने इस क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है।
इजरायल के इस हमले के बाद कई खाड़ी देशों ने भी चिंता जताई है।
इन देशों ने South Pars गैस फील्ड पर हमले की निंदा की और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की।
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हालांकि, ट्रंप ने फिलहाल साउथ पार्स पर हमले रोकने की बात कही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मिडिल ईस्ट में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर ईरान ने कतर या अन्य ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया या होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित की तो यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक मोड़ ले सकता है।