Satpura Tiger Reserve:दुर्लभ वन्यजीव पेंगोलिन का दीदार, कैमरे में कैद हुआ अनोखा नजारा

मध्यप्रदेश। सोहागपुर क्षेत्र में स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर जोन जमानी देव में एक बेहद दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव पेंगोलिन दिखाई दिया, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया। जंगल भ्रमण पर आए एक पर्यटक परिवार ने इस अनोखे जीव को चट्टानी क्षेत्र में घूमते हुए देखा और इस खास पल को कैमरे में कैद कर लिया। पेंगोलिन जैसे शर्मीले और रात में सक्रिय रहने वाले जीव का दिन के समय दिखाई देना बेहद दुर्लभ माना जाता है। इस घटना के बाद वन विभाग भी सतर्क हो गया है और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।
बफर जोन में दुर्लभ दृश्य
मध्यप्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर इलाके में बेहद दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव पेंगोलिन देखा गया है। इस अनोखे दृश्य ने न केवल पर्यटकों को रोमांचित किया बल्कि वन विभाग को भी सतर्क कर दिया है। यह घटना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
पर्यटक परिवार ने कैमरे में कैद किया खास पल
सोहागपुर से आए पर्यटक आर.के. दुबे अपने परिवार के साथ जंगल भ्रमण पर निकले थे। सुबह के समय जब वे जमानी देव क्षेत्र में पहुंचे तो उन्हें चट्टानी इलाके में एक अजीब सा जीव घूमता हुआ दिखाई दिया। करीब से देखने पर पता चला कि यह एक पेंगोलिन है, जिसे देखकर पूरा परिवार हैरान रह गया। इस दुर्लभ पल को उन्होंने तुरंत अपने कैमरे में कैद कर लिया और बाद में इसकी तस्वीरें साझा कीं।
पेंगोलिन की विशेषताएं और व्यवहार
पेंगोलिन एक अत्यंत शर्मीला और रात्रिचर जीव माना जाता है, जो आमतौर पर मनुष्यों की नजरों से दूर रहता है। इसके शरीर पर कठोर शल्क होते हैं, जो इसे अन्य जीवों से अलग बनाते हैं। खतरा महसूस होने पर यह खुद को गोलाकार रूप में समेट लेता है, जिससे यह और भी सुरक्षित हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह जीव बहुत कम दिखाई देता है और इसका दिखना एक दुर्लभ घटना मानी जाती है।
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वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
इस घटना की पुष्टि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े ने की है। उन्होंने बताया कि पेंगोलिन एक संकटग्रस्त प्रजाति है, जो सामान्यतः बहुत कम दिखाई देती है। इस क्षेत्र में इसके देखे जाने के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है ताकि इसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वहीं बागरा बफर के रेंजर विलास डोंगरे ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इलाके में विशेष गश्त बढ़ा दी गई है।
वन्यजीव संरक्षण कानून
पेंगोलिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकटग्रस्त जीव की श्रेणी में रखा गया है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इसे संरक्षित जीव घोषित किया है। भारत में यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत उच्चतम सुरक्षा प्राप्त प्रजातियों में शामिल है। इसके शिकार और अवैध व्यापार पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है।
जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेत
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सतपुड़ा जैसे क्षेत्रों में पेंगोलिन की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यहां का पर्यावरण और वन क्षेत्र अभी भी काफी सुरक्षित और संतुलित है। यह क्षेत्र की जैव विविधता के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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पर्यटकों में बढ़ा उत्साह
इस दुर्लभ दृश्य को देखने के बाद पर्यटक परिवार काफी उत्साहित और भावुक नजर आया। उन्होंने इसे अपने जीवन का यादगार अनुभव बताया। जंगल में इस तरह के दुर्लभ जीव का दिखना न केवल रोमांचक है बल्कि यह प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक समृद्धि और वन्यजीव संरक्षण की अहमियत को सामने ला दिया है।











