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जन्मदिन विशेष: संघर्ष और जनसेवा के सच्चे जनक, कैसे हुए दिग्गी राजा के नाम से मशहूर? जानें पूरी कहानी!

28 फरवरी को कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह का जन्मदिन आता है। वह नेता नगरी के एक ऐसे चेहरे हैं, जिनके बिना राजनीति की साख हमेशा अधूरी है और अधूरी ही रहेगी।
संघर्ष और जनसेवा के सच्चे जनक, कैसे हुए दिग्गी राजा के नाम से मशहूर? जानें पूरी कहानी!
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    विपक्ष के महत्वपूर्ण व कद्दावर कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज 78 साल के हो गए हैं। 28 फरवरी साल 1947 को इंदौर में इनका जन्म हुआ। इस प्रतिभाशाली नेता को सियासत विरासत में मिली थी। क्योंकि इनके पिता बलभद्र सिंह पहले से ही विधायक रहे चुके थे। इन्होंने साल 1969 में केवल 22 साल की उम्र में राघोगढ़ नगरपालिका का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर का आगाज कर लिया था। 

    फिर यह सिलसिला चलता चला गया। पहले विधायक, फिर सांसद और बाद में मुख्यमंत्री बनने का कारवां बढ़ता चला गया। वर्तमान में वे  राज्यसभा के सांसद हैं। कांग्रेस के सबसे मजबूत नेताओं में शुमार , दिग्विजय जी की बढ़ती उम्र भी उन्हें उनकी अहमियत घटाने नहीं देती। आज भी  वर्तमान दौर में इस नेतृत्वकर्ता  की सियासी प्रासंगिकता लगातार बनी हुई है।

    आखिर कैसे मिला दिग्गी राजा का नाम?

    दिग्विजय को राजनीति विरासत में मिली लेकिन अपनी महत्वपूर्ण छवि उन्होंने अपने दम पर बनाई है। उन्हें  दिग्गी राजा नाम का ये जो नाम मिला उसमें राघोगढ़ राजघराने का कोई कनेक्शन नहीं है। असल में  उन्हें यह नाम एक अखबार के संपादक ने दिया था। आइए जानें इस नाम के पीछे की पूरी कहानी


    राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री बनते ही युवा कांग्रेस नेताओं की एक कोर टीम बनाई थी। दिग्विजय सिंह उस समय उस महत्वपूर्ण टीम का हिस्सा  होने के साथ-साथ लोकसभा के सांसद भी थे। उन्हीं दिनों एक दिन दिल्ली के एक बड़े होटल में एक मीटिंग हो रही थी, जिसमें कांग्रेस के बड़े नेता और पत्रकार मौजूद थे। इसमें आरके करंजिया भी थे, जो एक अखबार के संपादक थे।

    हुआ यूं कि जबभी करंजिया दिग्विजय सिंह का नाम लेते, वे अटक जाते। कई बार कोशिश करने के बाद भी वे दिग्विजय का सही उच्चारण नहीं कर पाए। तब ऐसे में करंजिया ने उन्हें पहली बार दिग्गी राजा कहा। यह नाम छोटा और बोलने में आसान था। उन्होंने अपनी सहूलियत के लिए उन्हें दिग्गी राजा कहा था, लेकिन तभी से यह नाम दिग्विजय के साथ ऐसा जुड़ा जो आजतक जुड़ा हुआ है। चाहे चुनाव की रैलियां हो या अखबार की खबरें आज तक दिग्विजय सिंह को लोग दिग्गी राजा के नाम से जानते हैं। 

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    थानेदार ने रोक दी मोदी की गाड़ी, वजह दिग्विजय

    ये घटना साल 1998 की है, जब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने थे। उस समय मोदी को प्रदेश भाजपा का प्रभारी बनाया गया था। उनदिनों दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। नरेंद्र जी उस समय रायपुर से भोपाल लौटे थे और पार्टी के प्रदेश कार्यालय जा रहे थे। जैसे ही एयरपोर्ट से दो कारों में मोदी कार्यालय की ओर निकले ही थे, उससमय उनके साथ पार्टी के कुछ नेता और कुछ पत्रकार भी मौजूद थे। तभी मोदी की कार भोपाल के हमीदिया चौराहे पर पहुंची तो एक थानेदार ने उसे रुकने का इशारा किया।

    ड्राइवर ने पुलिसवाले को समझाने की कोशिश भी की। कार में नरेंद्र मोदी के होने के बारे में जानते हुए भी पुलिसकर्मी अपनी बात पर अड़ा रहा। थानेदार को धमकी भी दी गई कि विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी की सरकार बनी तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे लेकिन थानेदार इसके बाद भी अपनी बात से पीछे नहीं हटा। बाद में यह बात सामने आई कि इस पूरे प्रकरण के पीछे दिविजय सिंह थे। मोदी के पीछे उनकी गाड़ी थी जबतक दिग्गी राजा का काफिला निकला नहीं मोदी की गाड़ी को आगे बढ़ने नहीं दिया गया। यह पूरी कहानी इस बात को अच्छे तरीके से दर्शाती है कि उस दौर में दिग्विजय सिंह कितने दबंग नेता हुआ करते थे।

      

    Geetanjali Sharma
    By Geetanjali Sharma

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