संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मुबारकपुर बंद गांव में शुक्रवार को प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन करते हुए मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिरा दिया। दो हाइड्रा मशीनों की मदद से मीनार को खींचकर ढहाया गया। इससे पहले सुबह से ही मस्जिद के बाहर बनी दुकानों पर कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि, यह निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया था। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और संभावित विरोध को देखते हुए लोगों को मौके से हटाया गया।
संभल जिले के मुबारकपुर बंद गांव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन पिछले कई दिनों से कार्रवाई कर रहा है। आरोप है कि, करीब 30 साल पहले ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा किया गया और धीरे-धीरे यहां मस्जिद, मदरसा, दुकानें और मकान बना लिए गए।
बताया जा रहा है कि, करीब 15 साल पहले खेल मैदान की जमीन पर मस्जिद का निर्माण हुआ। इसके साथ ही पांच दुकानें और आठ मकान भी खड़े कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि, इसी जमीन पर दो सरकारी प्राइमरी स्कूल भी बने हुए हैं, जिनके बीच का रास्ता इस कब्जे की वजह से बाधित हो गया था।
शुक्रवार को दोपहर करीब 1:30 बजे प्रशासन ने मस्जिद की मीनार गिराने की कार्रवाई शुरू की। इसके लिए दो हाइड्रा मशीनें मंगाई गईं। एक मजदूर को मीनार पर चढ़ाकर रस्सी बांधी गई। रस्सी के दूसरे सिरे को दोनों हाइड्रा मशीनों से जोड़ा गया। इसके बाद मशीनों ने एक साथ खींचाव किया और कुछ ही देर में 35 फीट ऊंची मीनार भरभराकर गिर गई। मीनार गिरने के बाद बुलडोजर से मस्जिद के बाकी हिस्सों को भी तोड़ा जाने लगा।
इस कार्रवाई की शुरुआत सुबह करीब 9:30 बजे ही हो गई थी। सबसे पहले मस्जिद के बाहर बनी पांच दुकानों को गिराया गया। दोपहर 1 बजे तक ये दुकानें पूरी तरह ध्वस्त कर दी गईं। बताया गया कि, पहले भी इन दुकानों का कुछ हिस्सा हटाया गया था, लेकिन करीब 20 फीसदी हिस्सा बच गया था, जिसे शुक्रवार को पूरी तरह गिरा दिया गया।
इससे पहले 5 अप्रैल को भी प्रशासन मस्जिद पर कार्रवाई करने पहुंचा था। उस दिन मदरसा, दुकानें और मस्जिद का गेट तो गिरा दिया गया था, लेकिन मीनार को नहीं तोड़ा जा सका। दरअसल, बुलडोजर चालक ने मीनार गिराने से मना कर दिया था। उसका कहना था कि मीनार गिरने पर वह उसके ऊपर आ सकती है, जिससे जान का खतरा है। इसी वजह से उस दिन मीनार को छोड़ दिया गया था, जिसे अब जाकर गिराया गया।
कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह के विवाद या विरोध को रोकने के लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। मौके पर डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई खुद मौजूद रहे। करीब 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के अलावा पीएसी और अन्य फोर्स भी तैनात की गई। जब गांव के लोग मौके पर जुटने लगे तो पुलिस ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया।
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प्रशासन की सख्ती के बाद कुछ ग्रामीण खुद ही अपने घरों के अवैध हिस्से हटाने लगे हैं। गांव के गुलाम रसूल और आशा कार्यकर्ता आसमा ने अपने मकानों के हिस्सों को खुद तोड़ना शुरू कर दिया है। गुलाम रसूल का कहना है कि, उन्होंने यह जमीन 30 हजार रुपए में खरीदी थी और उन्हें यह नहीं पता था कि यह सरकारी जमीन है। वहीं आसमा ने कहा कि, उन्होंने 30 साल पहले पैसे देकर जमीन खरीदी थी, इसलिए अगर उन्हें हटाया जा रहा है तो पैसा वापस मिलना चाहिए।
संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया के अनुसार, यह पूरा निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से किया गया था। इस जमीन पर खेल का मैदान और खाद के गड्ढे थे, जो दो स्कूलों के बीच स्थित हैं। उन्होंने बताया कि, इस कब्जे के कारण दोनों स्कूलों के बीच संपर्क टूट गया था। अब कब्जा हटने के बाद दोनों स्कूल फिर से आपस में जुड़ जाएंगे। वहीं एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि जिले में सरकारी जमीनों को चिन्हित कर कब्जा हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे खुद ही अवैध कब्जा हटा लें, नहीं तो प्रशासन कार्रवाई करेगा।
ग्राम प्रधानपति हाजी मुनव्वर का कहना है कि, यह मामला करीब 30 साल पुराना है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के आदेश के बाद लोगों ने खुद ही दुकानें और मदरसा हटाना शुरू कर दिया था। हालांकि, मजदूरों की कमी के कारण काम पूरा नहीं हो पाया, जिसके बाद प्रशासन ने जेसीबी मशीनों से कार्रवाई की। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई से गांव के लोग दुखी हैं, क्योंकि मस्जिद में रोजाना 500-600 लोग नमाज पढ़ने आते थे।
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28 मार्च: तहसीलदार कोर्ट ने अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया
30 मार्च: निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई
31 मार्च: लोगों ने खुद से कुछ हिस्से तोड़ने शुरू किए
5 अप्रैल: मदरसा, दुकानें और गेट गिराया गया, मीनार बची रही
17 अप्रैल: मीनार और बाकी निर्माण पर बुलडोजर चला
गुरुवार को भी संभल में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ईदगाह और इमामबाड़े को बुलडोजर से गिरा दिया था। प्रशासन के मुताबिक, यह निर्माण भी सरकारी जमीन पर किया गया था। बताया गया कि करीब 7 बीघा चारागाह और खाद गड्ढे की जमीन पर ये ढांचे बनाए गए थे।
प्रशासन ने कहा कि, सरकारी जमीन पर बने सभी अवैध कब्जों को हटाया जाएगा। इसके लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि, ‘लैंड बैंक’ तैयार करने के तहत इस तरह की जमीनों को खाली कराया जा रहा है, ताकि उनका सही उपयोग हो सके।