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संबल योजना में बड़ा बदलाव:अब उम्र बदलना आसान नहीं, सरकार ने लागू किए सख्त नियम

मध्य प्रदेश की संबल योजना में अब उम्र को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। श्रमिकों की उम्र वही मानी जाएगी जो समग्र पोर्टल में दर्ज है। अब उम्र बदलना आसान नहीं होगा। सरकार का कहना है कि इससे गड़बड़ी रुकेगी और योजना का फायदा सही लोगों तक पहुंच पाएगा।
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अब उम्र बदलना आसान नहीं, सरकार ने लागू किए सख्त नियम
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्य प्रदेश में मजदूर और छोटे काम करने वाले लोगों के लिए चल रही संबल योजना में सरकार ने बड़ा बदलाव किया है जो सीधे लाखों लोगों को प्रभावित करेगा। अब इस योजना में पंजीकृत श्रमिकों की उम्र से जुड़ी जानकारी में बदलाव करना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि संबल पोर्टल पर दर्ज उम्र केवल समग्र पोर्टल में मौजूद जन्मतिथि के आधार पर ही तय होगी और गलत तरीके से लाभ लेने पर रोक लगाना मुख्य उद्देश्य है।

    अब समग्र पोर्टल ही तय करेगा उम्र

    राज्य सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि संबल योजना में किसी भी श्रमिक की उम्र की गणना अब सीधे समग्र पोर्टल पर दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही की जाएगी। इसका मतलब यह है कि अगर किसी श्रमिक की जानकारी में कोई अंतर पाया जाता है, तो संबल पोर्टल उसे अलग से मान्य नहीं करेगा। सरकार का मानना है कि इससे अलग अलग पोर्टल पर अलग जानकारी होने की समस्या खत्म होगी। पहले कई मामलों में यह देखा गया था कि श्रमिक अलग अलग दस्तावेजों के आधार पर अपनी उम्र में बदलाव करा लेते थे जिससे योजनाओं का लाभ गलत तरीके से लिया जाता था।

    मृत्यु के बाद उम्र में बदलाव पूरी तरह बंद

    इस नए नियम का सबसे सख्त हिस्सा यह है कि किसी भी श्रमिक की मृत्यु के बाद उसकी जन्मतिथि या उम्र में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से जारी निर्देशों में इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि कई बार मृत्यु के बाद रिकॉर्ड में बदलाव कर अनुग्रह राशि या अन्य लाभ लेने की कोशिश की जाती थी। अब इस पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। एक बार किसी श्रमिक की मृत्यु दर्ज हो गई  तो उसके बाद उसके डेटा में कोई भी संशोधन संभव नहीं होगा।

    मृत्यु दर्ज करने से पहले होगी सख्त जांच

    सरकार ने यह भी साफ किया है कि समग्र पोर्टल पर किसी भी श्रमिक की मृत्यु दर्ज करने से पहले उसकी जन्मतिथि की पूरी जांच की जाएगी। यानी पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो जानकारी दर्ज है  वह पूरी तरह सही है या नहीं। अगर किसी तरह की गलती पाई जाती है  तो उसे पहले ठीक करना होगा  उसके बाद ही मृत्यु की एंट्री की जाएगी। इससे बाद में होने वाले विवादों और गलत दावों को रोका जा सकेगा।

    सुधार का रास्ता भी सीमित

    अगर किसी श्रमिक की उम्र या जन्मतिथि में कोई गलती पाई जाती है तो उसे सुधारने का भी एक तय तरीका रखा गया है। अब यह काम सीधे किसी भी कार्यालय या अन्य माध्यम से नहीं हो सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उम्र में सुधार के लिए आवेदन केवल आईटी विभाग के माध्यम से ही किया जा सकेगा आम स्तर पर इस तरह के बदलाव की प्रक्रिया को सीमित कर दिया गया है ताकि बिना जांच के कोई भी बदलाव न हो सके।

    गड़बड़ियों पर लगेगी रोक

    श्रम विभाग के अपर सचिव संजय कुमार ने बताया कि ये सभी नियम संबल योजना में सख्ती से लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद योजना को पारदर्शी बनाना है और यह सुनिश्चित करना है कि सही व्यक्ति को ही इसका लाभ मिले। उनके मुताबिक पहले कई बार ऐसी शिकायतें सामने आई थी जिनमें उम्र में बदलाव कर लाभ लेने की कोशिश की गई थी। अब नए नियमों से इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।

    क्या है संबल योजना

    मध्य प्रदेश सरकार की संबल योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। इस योजना के तहत श्रमिकों और उनके परिवारों को कई तरह की आर्थिक सहायता दी जाती है। अगर किसी श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है  तो उसके परिवार को 4 लाख रुपए की सहायता दी जाती है, वहीं मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपए दिए जाते हैं इसके अलावा स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपए और आंशिक अपंगता पर 1 लाख रुपए की सहायता मिलती है।

    अन्य सुविधाएं भी शामिल

    संबल योजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है  बल्कि इसमें कई अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। श्रमिकों को अंत्येष्टि के लिए 5 हजार रुपए की मदद दी जाती है जिससे अंतिम संस्कार में आने वाली दिक्कतें कम हो सकें। महिला श्रमिकों के लिए भी इस योजना में विशेष प्रावधान हैं। प्रसूति सहायता के रूप में उन्हें 16 हजार रुपए दिए जाते हैं  जिससे गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आर्थिक मदद मिल सके।

    बच्चों की पढ़ाई का खर्च

    इस योजना का एक और अहम हिस्सा यह है कि श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई में भी सरकार मदद करती है। महाविद्यालय स्तर की पढ़ाई के लिए पूरी फीस राज्य सरकार द्वारा की जाती है। इससे उन परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है  जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और उच्च शिक्षा का खर्च नहीं उठा पाते।

    स्वास्थ्य और राशन की सुविधा

    राशन कार्ड के माध्यम से सस्ती दरों पर खाद्यान्न भी मिलता है। इसके अलावा उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ दिया जाता है। योजना से जुड़े सभी हितग्राहियों को आयुष्मान योजना के तहत शामिल किया गया है जिसके तहत उन्हें सालाना 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिल सकता है। इससे गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।

    सरकार का मकसद और आगे की दिशा

    सरकार का कहना है कि इससे फर्जीवाड़ा कम होगा और जरूरतमंद लोगों तक सही तरीके से लाभ पहुंच सकेगा। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि नियम सख्त होने से प्रक्रिया थोड़ी कठिन जरूर हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे व्यवस्था बेहतर होगी। सरकार अब योजनाओं में पारदर्शिता और सख्ती दोनों को प्राथमिकता दे रही है। उम्र से जुड़े नियमों को लेकर लिए गए फैसले से जहां गड़बड़ियों पर रोक लगेगी  वहीं सही लाभार्थियों को ही फायदा मिलेगा। अब श्रमिकों को भी अपने दस्तावेज सही रखने होंगे और किसी भी तरह की गलती को समय रहते ठीक कराना होगा क्योंकि बाद में सुधार की गुंजाइश काफी कम हो गई है।

    Aditi Rawat
    By Aditi Rawat

    अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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