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कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव शुरू...रुद्राक्ष से बने शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन

कुबेरेश्वर धाम में शनिवार से सात दिवसीय भव्य रुद्राक्ष महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। इस मौके पर प्रथम दिवस मंदिर परिसर में हजारों रुद्राक्ष से निर्मित शिव लिंग का पूर्ण विधि-विधान से पूजन अर्चन के पश्चात दोपहर में कथा का आयोजन किया गया।
रुद्राक्ष से बने शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    सीहोर/भोपाल । कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव के मौके पर कथा के पहले दिन कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहाकि जब तुम्हारे मन में अशांति हो, बैचानी हो दस मिनट के लिए वृक्ष के नीचे भगवान शिव का ध्यान करें। जब तक हमारा मन शांत नहीं होगा, ईश्वर के प्रति आस्थावान नहीं होगा, तब तक मनुष्य जीवन की सार्थकता नहीं है। कथा के पहले ही दिन विशाल परिसर में बनाए गए पंडाल भरा चुके है। कुबेरेश्वर धाम का महत्व: पंडित मिश्रा ने बताया कि जिस प्रकार ट्रेन के लिए स्टेशन और फ्लाइट के लिए एयरपोर्ट जाना होता है, उसी तरह महादेव को पाने के लिए कुबेरेश्वर धाम आना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह धाम 12 ज्योतिर्लिंगों के मध्य में स्थित है और यहां वही आता है जिससे बाबा स्वयं प्रेम करते हैं।

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    सैकड़ों किमी दूर से पैदल आया श्रद्धालु

    कथा के पहले दिन महाराष्ट्र से पैदल चलकर आए एक पिता का पंडित मिश्रा ने सम्मान किया। पैदल चलकर आए पिता का पत्र का उल्लेख करते हुए पंडित मिश्रा ने कहाकि पत्र में लिखा है कि उनकी बेटी को रोजगार नहीं मिल रहा था, तब उन्होंने संकल्प लिया था, संकल्प पूर्ण होते ही उन्होंने अपने क्षेत्र से धाम तक पैदल यात्रा की।

    बेटी और बहू के सम्मान का संदेश

    कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा,  'बेटी आपके पुण्यों की रसीद है। उन्होंने एक नया नारा देते हुए कहा कि अब केवल 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' ही नहीं बल्कि 'बहू पढ़ाओ, देश बचाओ' के संकल्प की आवश्यकता है। जिस घर में बेटी और बहू का सम्मान होता है, वहां दरिद्रता कभी नहीं आती।

    जल संरक्षण की सीख

    पर्यावरण के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि शादियों में पानी की बर्बादी रोकना अनिवार्य है। पानी की बोतलों पर लिखा होना चाहिए-  'मैं जल हूं, आने वाला कल हूं। यदि हमने आज जल का सम्मान नहीं किया, तो भविष्य में इसके लिए तरसना पड़ेगा।

    भगवान की 'शरण' और 'चरण' का अर्थ

    पंडित मिश्रा ने समझाया कि मंदिर में सिर झुकाना भगवान के 'चरणों' में होना है, लेकिन मंदिर से निकलकर कार्यक्षेत्र पर जाते समय भगवान को याद रखना उनकी 'शरण' में होना है।

    श्रद्धालुओं को बेलपत्र बांटे

    कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने भक्तों द्वारा आए पत्रों को पढ़ा और श्रद्धालुओं के बीच बेलपत्र का वितरण किया। यजमानों के नामोच्चार और सामूहिक शिव आरती के साथ प्रथम दिन की कथा का विश्राम हुआ। यह महोत्सव आगामी 20 फरवरी तक अनवरत जारी रहेगा।

    ग्रीन शिवरात्रि महोत्सव

    कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के पावन सानिध्य में इस वर्ष महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में श्री कुबेरेश्वर धाम में एक अनूठा और पर्यावरण-हितैषी 'ग्रीन शिवरात्रि महोत्सव' आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन आध्यात्मिकता को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।

    विशेष आकर्षण : ज्योतिर्लिंग गार्डन

    इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण ज्योतिर्लिंग गार्डन की स्थापना है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा परिसर में 12 विशेष पौधे रोपे जाएंगे जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इन पौधों को धाम से उनकी वास्तविक भौगोलिक दूरी के आधार पर स्केल डिस्टेंस पद्धति से रोपित किया जाएगा।

    पर्यावरण संरक्षण के तीन मुख्य संकल्प 

    • बेलपत्र पौधारोपण : प्रकृति की सेवा हेतु धाम में व्यापक स्तर पर बेलपत्र के पौधे लगाए जाएंगे।
    • अभिषेक जल का सदुपयोग : शिवलिंग पर अर्पित किए गए जल को व्यर्थ बहने से रोककर उसे भूगर्भ जल पुनर्भरण और पौधों की सिंचाई हेतु उपयोग में लाया जाएगा।
    • वैज्ञानिक निर्माल्य विसर्जन : पूजा के बाद एकत्रित फूलों और बेलपत्रों (निर्माल्य) को नदियों में विसर्जित करने के बजाय उनसे जैविक खाद बनाई जाएगी।
    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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