Manisha Dhanwani
16 Jan 2026
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16 Jan 2026
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16 Jan 2026
छत्रपति संभाजीनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में आयोजित हिंदू सम्मेलन में देशवासियों को आत्मनिर्भर बनने, स्थानीय उत्पादों को अपनाने और हिंदू समाज में एकता बनाए रखने की अपील की। भागवत ने कहा कि, भारत में कुछ भी अच्छा या बुरा घटित हो, तो हिंदुओं से इसके बारे में पूछा जाएगा। उन्होंने कहा कि, भारत सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि देश के चरित्र और मूल्य का प्रतीक है।
भागवत ने कहा कि, हिंदू समाज पारंपरिक रूप से समावेशी और स्वीकार करने वाला रहा है। इसमें रीति-रिवाज, पहनावा, खान-पान, भाषा, जाति और उपजाति की विविधताएं मौजूद हैं, लेकिन ये मतभेद कभी संघर्ष का कारण नहीं बने। उन्होंने कहा, जो लोग सद्भाव और एकीकरण में विश्वास रखते हैं, वही हिंदू समाज और देश के सच्चे चरित्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि, सदियों के आक्रमणों और विनाश के बावजूद हिंदू समाज ने अपने धर्म और मूल्यों को सुरक्षित रखा और यही भारत की असली पहचान है।
भागवत ने आत्मनिर्भरता और लोकल उत्पादों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा- जहां तक संभव हो, देश में बना हुआ सामान ही खरीदें। जो वस्तु यहां नहीं बनती, उसे ही विदेश से मंगाएं। भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सक्रिय है, लेकिन किसी भी देश के दबाव में नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि, चाहे कोई देश टैरिफ लगाए या किसी तरह का दबाव डाले, भारत ने आत्मनिर्भर बनने का मार्ग चुना है और हमें इसी पर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने ग्लोबलाइजेशन के दृष्टिकोण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, कई देश इसे सिर्फ वैश्विक बाजार के नजरिए से देखते हैं, जबकि भारत इसे वैश्विक परिवार के नजरिए से देखता है।
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भागवत ने स्पष्ट किया कि, शक्ति केवल सशस्त्र बल नहीं है, बल्कि इसमें बुद्धि, नैतिकता, सिद्धांत और ज्ञान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि, जब भारत के नागरिक अच्छे, ईमानदार और दृढ़ होंगे, तभी देश विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा।
भागवत ने हिंदुओं में एकता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि, यह सिर्फ आरएसएस का लक्ष्य नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से कहा- जाति, संप्रदाय, भाषा या व्यवसाय की परवाह न करें। भाईचारे और समानता की भावना बनाए रखें। अन्याय के खिलाफ कदम-दर-कदम लड़ें।
भागवत ने भगवान राम का उदाहरण देते हुए कहा कि, पहले संवाद और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजा गया, लेकिन जरूरत पड़ने पर युद्ध भी किया गया।
आरएसएस प्रमुख ने युवाओं से कहा कि, वे विदेश जाकर ज्ञान और कौशल सीखें, लेकिन इसे भारत के विकास में इस्तेमाल करें। साथ ही उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को जानने की भी सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि, परिवार का महत्व हमेशा बनाए रखें। परिवार के सदस्य कम से कम हफ्ते में एक बार एक साथ बैठें, भजन करें, भोजन साझा करें और पूर्वजों की परंपराओं पर चर्चा करें।
भागवत ने कहा कि, सनातन धर्म और आध्यात्मिकता भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं, जो सदियों तक देश की सभ्यता को टिकाए रखने में मदद करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि, दुनिया केवल शक्तिशाली राष्ट्रों की भाषा समझती है, लेकिन सही और स्थायी ताकत वही होती है जो बुद्धि, चरित्र और नैतिक मूल्य पर आधारित हो।
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