मप्र में सड़कों को ‘कैटल फ्री’ करने रोडमैप बना, भोपाल समेत 6 जिलों में प्रोजेक्ट शुरू

मंत्री बोले- मवेशियों के कारण बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, सभी जिलों में करेंगे सख्ती
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मप्र में सड़कों को ‘कैटल फ्री’ करने रोडमैप बना, भोपाल समेत 6 जिलों में प्रोजेक्ट शुरू

राजीव सोनी-भोपाल। पिछले दिनों पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया की कार सीहोर के पास गाय को बचाने में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दरअसल सड़कों पर पशुओं का डेरा बड़ी समस्या बन गई है। इससे निपटने के लिए सरकार ने सड़कों को ‘कैटल फ्री’ करने रोडमैप तैयार किया है। भोपाल बायपास से लेकर ओबेदुल्लागंज, बाड़ी- बरेली और समीपस्थ जिलों के हाई-वे को तत्काल ‘कैटल फ्री’ करने की मुहिम शुरू की गई है। पायलट प्रोजेक्ट भोपाल, सीहोर, देवास, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ से होकर गुजरने वाले हाई-वे पर चल रहा है। हर जिले में पालतू और बेसहारा मवेशियों का सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद पशुपालकों पर जुर्माने की कार्रवाई होगी।

राजधानी में रोज 40 हादसे

राजधानी भोपाल को करीब दो दशक पहले कैटल फ्री करने का ऐलान हुआ था, लेकिन यह हो न सका। भोपाल में सड़कों पर 10 हजार से ज्यादा आवारा मवेशी घूम रहे हैं। नगर निगम की मानें तो शहर की सड़कों पर रोजाना आवारा मवेशियों की वजह से 40 से ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं।

बड़े शहरों के हालात

  • जबलपुर : गढ़ा फाटक मेन रोड पर दो पशुओं की लड़ाई के दौरान एक का सींग मयंक गुप्ता के पेट में घुस गया। 24 साल के मयंक की मौत हो गई।
  • ग्वालियर : महलगांव के गिरीराज पाठक और उनके दोस्त की बाइक को सांड ने टक्कर मार दी, दोनों घायल हो गए।

पशुपालन मंत्री लखन पटेल से सीधी बात

  • सड़कों से मवेशियों को हटाने क्या कदम उठा रहे हैं? - सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है। अभी भोपाल समेत 6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
  • इन गो-वंश को कहां ले जाएंगे? - गो-अभयारण्य और गोशालाओंके अलावा सड़कों के किनारे शैड बनाने की योजना है।
  • हाई-वे सहित सागर,जबलपुर, होशंगाबाद, उज्जैन, सीहोर व रायसेन जिले सहित कई जिलों में यह समस्या विकराल है? - हमने सभी कलेक्टरों को उपाय करने को कहा है। सख्ती करने के पहले ग्रामीण-किसानों को जागरूक भी करेंगे।
  • पायलट प्रोजेक्ट कब तक चलेगा? - इसे 3 माह के लिए शुरू किया है। इसके बाद अन्य जिलों में लागू करेंगे।

सड़कों पर जानवरों के रहने से दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। सरकार को इस पर बहुत पहले ध्यान देना था, अभी भी इस पर अच्छे से काम होना चाहिए। - नेहा सिंह, स्टूडेंट, भोपाल

भोपाल जिले में 5 हजार क्षमता वाली गो-शाला के निर्माण की तैयारी है। पायलट प्रोजेक्ट में हर 50 किमी पर घायल गोवंश को उठाने एंबुलेंस के साथ 3 कर्मचारी तैनात किए हैं। 30 जुलाई तक भोपाल के आसपास से 2,172 गो-वंश और 240 घायल मवेशियों को उठाया गया। - कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर, भोपाल

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