रीवा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध के बीच आदिवासी महिला की मौत, चार दिन से कर रही थीं जल सत्याग्रह

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध के बीच जल सत्याग्रह कर रही आदिवासी महिला विमला कोल की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। उनके परिजनों के मुताबिक विमला पिछले चार दिनों से ग्रामीणों के साथ तालाब में खड़े होकर परियोजना का विरोध कर रही थीं। बुधवार देर रात उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है। वहीं कलेक्टर नरेंद्र प्रजापति ने कहा है कि महिला की मौत के सटीक चिकित्सकीय कारणों की जांच कराई जा रही है।
चार दिन से ग्रामीणों के साथ कर रही थीं जल सत्याग्रह
परिजनों के अनुसार, विमला कोल, पत्नी जमुना कोल, प्रस्तावित परियोजना के विरोध में ग्रामीणों के साथ लगातार जल सत्याग्रह कर रही थीं। वे रोजाना गांव के तालाब में पानी के भीतर खड़े होकर आंदोलन में शामिल होती थीं। बुधवार देर रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। गुरुवार दोपहर गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। विमला की मौत के बाद आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों में आक्रोश है। हालांकि उनकी मौत का सटीक चिकित्सकीय कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
जमीन की प्रारंभिक जांच के बाद शुरू हुआ था विरोध
सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीण पहले से विरोध कर रहे हैं। अक्टूबर में जमीन की प्रारंभिक जांच के लिए बोरिंग मशीनें पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया था। इसके बाद ग्राम सभा में परियोजना के विरोध में प्रस्ताव भी पारित किया गया। ग्रामीणों की मांग है कि प्रस्तावित परियोजना को रद्द किया जाए। प्रशासन की ओर से समझाइश दिए जाने के बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
पति बोले- चार दिन से सत्याग्रह कर रही थीं विमला
विमला कोल के पति जमुना कोल ने कहा कि उनकी पत्नी शुरुआत से ही प्लांट के विरोध में ग्रामीणों के साथ खड़ी थीं। उनके मुताबिक, विमला लगातार चार दिन से जल सत्याग्रह कर रही थीं और बुधवार रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। जमुना कोल ने पत्नी की मौत पर गहरा दुख जताते हुए प्रशासन से सवाल किया कि अब उनकी पत्नी को वापस कौन ला सकता है। उन्होंने कहा कि इस घटना से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है।
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सामाजिक कार्यकर्ता ने की निष्पक्ष जांच की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने महिला की मौत को दुखद और गंभीर घटना बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी जमीन, पानी और पर्यावरण की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण जल सत्याग्रह के दौरान महिला की मौत के मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही प्रशासन की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया।
कलेक्टर बोले- जमीन आवंटित नहीं, प्रारंभिक जांच चल रही थी
रीवा कलेक्टर नरेंद्र प्रजापति के मुताबिक, प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि परमाणु बिजलीघर के लिए किसी निजी कंपनी को जमीन आवंटित नहीं की गई है। उनके अनुसार, उस समय केवल प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता और व्यवहार्यता की प्रारंभिक जांच की जा रही थी। कलेक्टर ने बताया कि विमला कोल की मौत के सटीक चिकित्सकीय कारणों की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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मौत के कारण और आंदोलन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार
विमला कोल की मौत के बाद प्रस्तावित परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन ने गंभीर मोड़ ले लिया है। एक ओर ग्रामीण परियोजना रद्द करने की मांग कर रहे हैं वहीं प्रशासन का कहना है कि फिलहाल जमीन की प्रारंभिक जांच ही की जा रही थी।




















