संजय कुमार तिवारी, जबलपुर। चिरहुला हनुमान मंदिर विंध्य क्षेत्र की आस्था का एक ऐसा केंद्र है जिसकी पहचान सिर्फ एक मंदिर तक सीमित नहीं, बल्कि एक जागृत दरबार के रूप में है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में श्रद्धालु सिर्फ दर्शन करने नहीं आते बल्कि अपनी समस्याओं की “अर्जी” लेकर पहुंचते हैं। यही वजह है कि इसे मन्नतों का दरबार भी कहा जाता है। मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर यहां आस्था का विशेष माहौल देखने को मिलता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सैकड़ों साल पहले यहां एक संत ने कठोर तपस्या की थी। उनकी साधना से प्रसन्न होकर भगवान हनुमान इस स्थान पर प्रकट हुए और आशीर्वाद दिया। इसके बाद यहां मंदिर की स्थापना हुई और धीरे-धीरे यह पूरे विंध्य क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।
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मंदिर के पुजारी गोकर्ण प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि यहां की सबसे खास बात “अर्जी लगाने” की परंपरा है।

श्रद्धालु अपनी समस्या कागज पर लिखकर या मन ही मन बजरंगबली के सामने रखते हैं। नारियल, चोला और सिंदूर चढ़ाकर मन्नत मांगी जाती है। मुराद पूरी होने पर लोग दोबारा आकर धन्यवाद अर्पित करते हैं। स्थानीय लोगों में यह विश्वास गहरा है कि यहां “देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं।”
मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा पर चढ़ा सिंदूर इसकी खास पहचान है। यहां चोला चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे संकटों से मुक्ति और मनोकामना पूरी होने का प्रतीक माना जाता है।
हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। रीवा के साथ-साथ सतना, सीधी, प्रयागराज और छत्तीसगढ़ से भी लोग बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए आते हैं।
मंदिर से जुड़ी कई ऐसी कहानियां हैं, जो लोगों की आस्था को और गहरा करती हैं। सतना निवासी कामता प्रसाद तिवारी बताते हैं कि उनकी पत्नी लंबे समय से बीमार थी, लेकिन यहां अर्जी लगाने के बाद कुछ ही महीनों में स्वस्थ हो गईं। वहीं सीधी के रामप्रताप पटेल कहते हैं कि परिवार में चल रहा तनाव मंदिर में अर्जी लगाने के बाद खत्म हो गया और घर में शांति लौट आई।
हनुमान जयंती के अवसर पर यहां भव्य आयोजन होता है। पूरा क्षेत्र मेले में बदल जाता है। भजन-कीर्तन, भंडारे और धार्मिक कार्यक्रमों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
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चिरहुला हनुमान मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है। यहां आने वाला हर व्यक्ति एक उम्मीद लेकर आता है, और यही विश्वास इस धाम को खास बनाता है।