Aakash Waghmare
25 Jan 2026
Naresh Bhagoria
25 Jan 2026
भारत के लिए 77वां गणतंत्र दिवस बेहद खास रहा। इसकी वजह सिर्फ परेड या समारोह नहीं, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाला संभावित मुफ्त व्यापार समझौता (FTA) है। माना जा रहा है कि इस मौके पर भारत-EU संबंधों को नई दिशा मिलने वाली है।
गणतंत्र दिवस परेड में इस बार यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के तौर पर भारत पहुंचे हैं। उनके साथ यूरोप के करीब एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक, परेड के तुरंत बाद भारत और EU के बीच FTA पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
इस साल गणतंत्र दिवस पर सिर्फ राजनीतिक घटनाएं ही नहीं, बल्कि उर्सुला वॉन डेर लेयन का पहनावा भी चर्चा में रहा।कर्तव्य पथ पर जब वे सामने आईं, तो उनका भारतीय परिधान सबका ध्यान खींच ले गया। उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इस खास मौके पर ब्रोकेड शेरवानी पहनी। यह शेरवानी गहरे सुनहरे और तांबे रंग के शेड्स में थी, जिसमें पारंपरिक बुनावट साफ नजर आ रही थी। यह आउटफिट भारतीय संस्कृति और शाही विरासत की झलक देता दिखा।

उनकी शेरवानी में इस्तेमाल किया गया रिच ब्रोकेड फैब्रिक सदियों से भारतीय राजघरानों और खास अवसरों से जुड़ा रहा है। फ्लोरल और पारंपरिक मोटिफ्स के साथ तैयार यह शेरवानी न पूरी तरह भारतीय थी और न ही पूरी तरह यूरोपीय बल्कि दो सभ्यताओं का संतुलित मेल नजर आया।
उर्सुला वॉन डेर लेयन वर्तमान में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं। यह संस्था यूरोपीय संघ के 27 देशों का प्रतिनिधित्व करती है। वे पहली बार 2019 में इस पद पर चुनी गईं और 2024 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।
उर्सुला का जन्म 8 अक्टूबर 1958 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हुआ। उनके पिता यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने पहले अर्थशास्त्र पढ़ा, फिर चिकित्सा को अपना करियर बनाया और जर्मनी से मेडिकल डॉक्टर बनीं।
उर्सुला ने 40 की उम्र के बाद राजनीति में कदम रखा। वे जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल की सरकार में लंबे समय तक मंत्री रहीं। उन्होंने सामाजिक सुधार, परिवार और करियर में संतुलन, और सेना में लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर काम किया।
2019 में उर्सुला वॉन डेर लेयन यूरोपीय आयोग की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। उन्हें एक मेहनती और काम के प्रति समर्पित नेता के तौर पर जाना जाता है। आज वे यूरोप की साझा आवाज के रूप में दुनिया के सामने नेतृत्व कर रही हैं।