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प्रीति जैन- सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के बोर्ड एग्जाम की डेटशीट जारी कर दी गई है और कुछ स्कूल्स में प्री-बोर्ड शुरू हो चुके हैं। वहीं, 15 फरवरी से 10 वीं व 12 वीं की परीक्षाएं व उससे पहले प्रैक्टिकल एग्जाम शुरू हो जाएंगे। स्टूडेंट्स की तैयारी ठीक तरह से हो सके व उन्हें पेपर का पैटर्न समझ आए इसके लिए बोर्ड ने अपनी एकेडमिक वेबसाइट पर साल 2024-25 के सैंपल पेपर्स भी दोनों ही कक्षाओं के लिए अपलोड कर दिए हैं।
साथ ही पिछले 10 साल के सैंपल पेपर्स भी बोर्ड की वेबसाइट पर हैं। इसके साथ ही बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ओपन बुक एग्जाम जैसी कोई व्यवस्था इस साल नहीं है, इसलिए किसी भी तरह से वायरल हो रहे नोटिस पर ध्यान न दें और सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट व स्कूल की जानकारी पर ही भरोसा करें। फरवरी से टेली काउंसलिंग सर्विस भी शुरू कर दी जाएगी।
किसी भी विषय को जल्दी सीखने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रक्रिया है। यह तकनीक नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फेनमैन ने विकसित की थी। इस तकनीक की मकसद से किसी भी विषय को जटिलता के बावजूद सीखना होता है। इसमें किसी जटिल अवधारणा को समझने के लिए सरल शब्दों और चित्रों का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल कर किसी भी विषय को दूसरों को समझा सकते हैं। इस टेक्निक का इस्तेमाल करके कठिन शब्दावली, फार्मूला या उत्तर को चित्रों की मदद से याद रख सकते हैं। स्टूडेंट्स इस टेक्निक को अपने रिवीजन में अपना सकते हैं।
इसमें सर्वे, क्वेश्चन, रीड, रिसाइट और रिव्यू शामिल है। इस तकनीक में चेप्टर का ओवरव्यू करना शामिल है, जिसमें हैडिंग, सब- हैडिंग व हाइलाइटिंग पाइंट्स पर फोकस किया जाता है। इसे पढ़कर उत्तर की डिटेलिंग याद करने की कोशिश करना होती है। इसमें हैडिंग व सब हैडिंग के साथ क्या जवाब लिखना होता है, इसे रिकॉल करना होता है। यदि जवाब याद आते हैं तो इसका मतलब है कि मुख्य पाइंट्स याद हैं, जिनके आधार पर जवाब दिए जाएंगे।
कई बार ऐसा होता है कि क्लास में टीचर ने कोई अहम बात बताई और इसे नोट करना भूल गए लेकिन उस बात को याद रखने के लिए बार-बार दिमाग में लाना होगा और नोट करना होगा। इस तकनीक के अंतर्गत अतीत में सीखी गई किसी चीज को अपनी याददाश्त से फिर से बनाना और उसके बारे में सोचना शामिल है। दूसरे शब्दों में, किसी किताब में पढ़कर या टीचर से सुनकर कुछ सीखने के कुछ समय बाद, आपको उसे दिमाग में लाना होगा। पुन: प्राप्ति की यह प्रक्रिया बाद में सूचना को अधिक पुन: प्राप्त करने योग्य बनाती है। केवल अपने नोट्स को देखकर स्टडी करने की तुलना में, यदि इस तकनीक का अभ्यास करते हैं, तो बाद में सूचना याद रखना अधिक आसान होगा।
मॉक टेस्ट व प्री-बोर्ड सेल्फ असेसमेंट का सबसे अच्छा जरिया हैं। यदि एक प्री- बोर्ड में स्कोर ठीक नहीं आता तो घबराने की जरूरत नहीं है, दूसरा, प्री-बोर्ड भी स्कूल कराते हैं, जिसमें कमियों पर काम करके फिर से परीक्षा दी जा सकती है। अभी भी दो महीने का पूरा समय बाकी है। स्कूल्स में सिलेबस खत्म हो चुका है और रिवीजन का पर्याप्त समय है। - डॉ. शिखा रस्तोगी, सीबीएसई काउंसलर
सीबीएसई के पिछले सालों के सैंपल पेपर फॉलो करें व एनसीईआरटी को बहुत अच्छे से पढ़ें। रटने वाले जवाब नहीं अब रियल वर्ल्ड में कैसे एप्लीकेशन होगा इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। फैक्ट्स याद रखने के लिए चित्रों व कुछ मेमोरी टेक्नीक का यूज करें ताकि रिकॉल कर सकें। अपना स्क्रीन टाइम घटाकर स्टडी टाइम बढाएं। कहीं कोई संशय हो तो अपने सब्जेक्ट टीचर से मिलकर हल निकालें। - शैलेष झोपे, प्रिंसिपल