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17 या 18 अगस्त... कब है कल्कि जयंती? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

कल्कि जयंती 2026 की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है। द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल षष्ठी तिथि के आधार पर कल्कि जयंती 18 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। जानें षष्ठी तिथि का समय, भगवान कल्कि की पूजा का शुभ मुहूर्त, उनके जन्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और कल्कि जयंती पर किए जाने वाले विशेष धार्मिक कार्य।
17 या 18 अगस्त... कब है कल्कि जयंती? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त
कल्कि जयंती की सही तारीख जानिए

भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने समय-समय पर अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना के लिए अलग-अलग अवतार लिए। इन्हीं में भगवान विष्णु का कल्कि अवतार भी शामिल है, जिसे कलियुग का अंतिम अवतार माना जाता है। इसी भविष्य में होने वाले अवतार की स्मृति और प्रतीक्षा में हर साल सावन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती मनाई जाती है।

17 या 18 अगस्त, कब है कल्कि जयंती?

कल्कि जयंती की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच कन्फ्यूजन है। कुछ लोग इसे 17 अगस्त को मनाने की बात कह रहे हैं, जबकि कई जगह 18 अगस्त की तारीख बताई जा रही है। द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, कल्कि जयंती 18 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।

सावन शुक्ल षष्ठी तिथि 17 अगस्त की शाम 5 बजे शुरू होगी और 18 अगस्त की शाम 5 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 18 अगस्त को कल्कि जयंती मनाना शुभ माना जा रहा है।

कल्कि जयंती का सबसे शुभ मुहूर्त

18 अगस्त 2026 को भगवान कल्कि की पूजा के लिए विशेष मुहूर्त दोपहर 4:21 बजे से शाम 5:50 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, विजय मुहूर्त, गोधूलि मुहूर्त और अन्य शुभ समय में की जा सकती है। हालांकि, भगवान कल्कि की विशेष पूजा के लिए निर्धारित मुहूर्त को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त - 04:25 ए एम से 05:08 ए एम

प्रातः सन्ध्या - 04:46 ए एम से 05:52 ए एम

अभिजित मुहूर्त - 11:59 ए एम से 12:51 पी एम

विजय मुहूर्त - 02:36 पी एम से 03:28 पी एम

गोधूलि मुहूर्त - 06:58 पी एम से 07:20 पी एम

सायाह्न सन्ध्या - 06:58 पी एम से 08:03 पी एम

अमृत काल - 09:19 पी एम से 11:02 पी एम

निशिता मुहूर्त - 12:03 ए एम, अगस्त 19 से 12:47 ए एम, अगस्त 19

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भगवान कल्कि का जन्म कहां होगा?

धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि के अवतार से जुड़ी कई कथाओं का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि कलियुग के अंत में भगवान कल्कि का जन्म शम्भल नामक स्थान पर विष्णुयश नाम के ब्राह्मण के घर होगा। कहा जाता है कि भगवान कल्कि घोड़े पर सवार होकर अधर्म और बुराई का नाश करेंगे तथा पृथ्वी पर धर्म की पुनः स्थापना करेंगे।

कल्कि जयंती पर क्या करें?

कल्कि जयंती के दिन भगवान विष्णु और भगवान कल्कि की विशेष पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रख सकते हैं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं। कई लोग विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत पूरा होने के बाद अगले दिन ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण किया जाता है।

कल्कि अवतार को क्यों माना जाता है खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब कलियुग के अंत में पाप और अधर्म चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेकर अधर्म का नाश करेंगे। इसके बाद धर्म और सत्य की स्थापना होने की मान्यता है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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