छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण : आश्रम–चर्च की आड़ में ‘बड़ा गेम’, नाबालिगों पर दबाव, धर्म बदलवाने का ‘सुपर नेटवर्क’ उजागर

छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण गतिविधियों से जुड़े अब तक के सबसे बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा होने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है। 8 जनवरी को राजनांदगांव जिले के ग्राम धर्मापुर से शुरू हुई एक शिकायत के बाद आश्रम और चर्च संचालन की आड़ में नाबालिग बच्चों को रखने, सुनियोजित धर्मांतरण, विदेशी संसाधनों के इस्तेमाल और राज्यव्यापी नेटवर्क के चौंकाने वाले सबूत सामने आए हैं।
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 आश्रम–चर्च की आड़ में ‘बड़ा गेम’, नाबालिगों पर दबाव, धर्म बदलवाने का ‘सुपर नेटवर्क’ उजागर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    संजय सिंह राजपूत, राजनांदगांव। धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर राजनांदगांव पुलिस ने डेविड चाको के खिलाफ छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह मामला अब एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। दरअसल, 8 जनवरी को थाना लालबाग अंतर्गत पुलिस चौकी सुकुलदैहान में प्राप्त लिखित शिकायत के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे सामने आने लगे। शिकायत में आश्रम/चर्च संचालन, नाबालिग बच्चों को रखने और कथित धर्मांतरण गतिविधियों की स्पष्ट जानकारी दी गई थी। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया और नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के सुपरविजन में पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जल्द ही इस मामले में राज्यव्यापी नेटवर्क की परतें भी खुल सकती है।

    कई चेहरे शक के घेरे में

    जांच के दौरान जब्त किए गए रजिस्टर, दस्तावेज और अभिलेख इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि कथित धर्मांतरण गतिविधियां पूरी तरह संगठित और योजनाबद्ध तरीके से संचालित की जा रही थीं। प्रारंभिक जांच में सैकड़ों लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। पुलिस अब एक-एक कड़ी जोड़ते हुए नेटवर्क की पूरी संरचना खंगाल रही है।

    डिजिटल जिहाद? हाई-टेक प्रचार का खुलासा

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    विवेचना के दौरान पुलिस के हाथ लैपटॉप, टैबलेट, आई-पैड और मोबाइल फोन जैसे अहम डिजिटल साक्ष्य लगे हैं। इनमें मौजूद डिजिटल डेटा, प्रेजेंटेशन और प्रचार सामग्री से यह सामने आया है कि प्रचार आधुनिक तकनीक के सहारे किया जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने सोलर-आधारित प्रोजेक्टर भी जब्त किए हैं, जिनकी कीमत हजारों डॉलर आंकी जा रही है। इनका उपयोग उन इलाकों में किया जा रहा था, जहां बिजली तक उपलब्ध नहीं है।

    राज्यभर में फैली जड़ें

    पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल राजनांदगांव तक सीमित नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में सक्रिय था। कई अन्य संदिग्धों की पहचान हो चुकी है, जिन्हें कानूनी नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

    अब फोकस विदेशी फंडिंग पर

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का फोकस अब धन के स्रोतों और वित्तीय लेन-देन पर है। आशंका जताई जा रही है कि आश्रम और चर्च संचालन के लिए बाहरी या विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध किसी अन्य संगठित या अवैध गतिविधि से है।

    जांच के आधार पर कार्रवाई करेंगे

    कोई भी संस्था कानून से ऊपर नहीं है. मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे उसे हिसाब से विधि सम्मत और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    अंकिता शुक्ला, एसपी राजनांदगांव

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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