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बच्चों के डिजिटल मीडिया इस्तेमाल पर राष्ट्रीय नीति की सिफारिश

सी-लैब ने स्कूलों में स्मार्टफोन पर रोक समेत दिए पांच अहम सुझाव, 110 देशों की नीतियों का अध्ययन
बच्चों के डिजिटल मीडिया इस्तेमाल पर राष्ट्रीय नीति की सिफारिश
भोपाल। भुवन ऋभु ।

भोपाल। सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज (सी-लैब) ने बच्चों के डिजिटल मीडिया इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की सिफारिश की है। संस्था की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश समेत देशभर के स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने और उम्र के आधार पर बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच देने जैसे सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के पालन की कानूनी जिम्मेदारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की होनी चाहिए और उल्लंघन पर कार्रवाई भी प्लेटफॉर्म के खिलाफ हो, बच्चे या उसके माता-पिता के खिलाफ नहीं।

सी-लैब ने 110 देशों में लागू स्कूल स्मार्टफोन नीतियों का अध्ययन किया है। इसके आधार पर सुझाव दिया गया है कि प्राथमिक और निचली माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल समय में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

सरकार की कानूनी जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश

रिपोर्ट का नाम ‘प्रिवेंशन बाय डिजाइन: फ्रॉम वॉलंटरी सेल्फ-रेगुलेशन टू अ स्टेट ड्यूटी ऑफ केयर’ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए कंपनियों के स्वैच्छिक नियमों पर निर्भर रहने के बजाय सरकार की कानूनी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

रिपोर्ट को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में जारी किया गया। सी-लैब शोध और नीति से जुड़ी संस्था है तथा जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सहयोगी संस्था है।

इस अवसर पर जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ बच्चों को होने वाले नुकसान का दायरा भी बढ़ा है। ऑनलाइन नुकसान से निपटने के लिए ऐसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की जरूरत है, जो देशों की सीमाओं तक सीमित न हो।

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रिपोर्ट के पांच प्रमुख सुझाव

15 साल से कम उम्र में सोशल मीडिया पर रोक: 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं देने की सिफारिश की गई है। 15 से 16 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक की पहचान और सहमति की पुष्टि की व्यवस्था हो और इसकी जिम्मेदारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की हो।

बच्चों को टारगेटेड विज्ञापन से बचाने की सिफारिश: नाबालिगों की ऑनलाइन गतिविधियों और पसंद से जुड़ी जानकारी जुटाकर उन्हें लक्षित विज्ञापन दिखाने पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही ‘इनफिनिट स्क्रॉलिंग’ और बच्चों को लगातार प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाले ‘डार्क पैटर्न’ पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।

निजता के साथ उम्र की पुष्टि: उम्र सत्यापन के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी सुरक्षित रहे।

स्वतंत्र निगरानी संस्था: ऑनलाइन सुरक्षा की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र संस्था गठित करने की सिफारिश की गई है।

नीति निर्माण में बच्चों की भागीदारी: बच्चों को नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल करने और उन्हें डिजिटल दुनिया का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने के लिए शिक्षित करने का सुझाव दिया गया है।

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Devendra shakya
By Devendra shakya

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