स्पोर्ट्स डेस्क। जम्मू- कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी में नया कीर्तिमान रचा है, टीम ने शनिवार को कर्नाटक को पहली पारी की बढ़त के आधार पर बड़ी शिकस्त देकर विजेता बनी है। टीम साल 1959 से इस टूर्नामेंट में भाग ले रही है लेकिन अब तक एक भी बार खिताब जीतने में सफल नहीं हो पाई, लेकिन टीम ने इस तमके को हटाकर आज रणजी ट्रॉफी का पहला खिताब जीता है।
जम्मू-कश्मीर की इस ऐतिहासिक जीत पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने टीम को 2 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया। साथ ही सीएम ने कहा यह राशि प्लेयर्स, सपोर्ट स्टाफ और मैनेजमेंट में बांटी जाएगी। फाइनल मैच के लिए उमर अबदुल्ला खुद स्टेडियम में मैच देखने पहुंचे थे।
बेंगलुरु के पास हुवली क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए पांच दिन के मुकाबले में जम्मू- कश्मीर की टीम ने बेहतरीन खेल दिखाया। 24 फरवरी को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम ने पहली पारी में 584 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। मजबूत बल्लेबाजी के दम पर टीम ने मुकाबले में शुरुआत से ही पकड़ बना ली।
इसके जवाब में कर्नाटक की टीम 293 रन पर ऑलआउट हो गई। पहली पारी में मिली बड़ी बढ़त ने मैच की दिशा तय कर दी।दूसरी पारी में जम्मू एंड कश्मीर ने चार विकेट के नुकसान पर 342 रन बनाए और पारी घोषित कर दी। पहली पारी में मिली बढ़त के आधार पर जम्मू एंड कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।
यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम ने आठ बार की चैंपियन कर्नाटक को हराकर बड़ा उलटफेर किया। खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि जम्मू एंड कश्मीर की टीम घरेलू क्रिकेट में मजबूत दावेदार बनकर उभर रही है।
जम्मू-कश्मीर की टीम ने मैच के पांचवें और अंतिम दिन 186/4 के स्कोर से अपनी दूसरी पारी आगे बढ़ाई। टीम की ओर से कामरान इकबाल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 160 रन की नाबाद पारी खेली, जबकि साहिल लोत्रा ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 101 रन बनाकर शतक जड़ा। दोनों बल्लेबाजों ने संयम और आत्मविश्वास के साथ पारी को संभाला और बढ़त को और मजबूत किया।
लंच के बाद जम्मू-कश्मीर ने 4 विकेट पर 342 रन के स्कोर पर अपनी दूसरी पारी घोषित कर दी। पहली पारी में मिली बड़ी बढ़त के आधार पर मुकाबला ड्रॉ घोषित किया गया, लेकिन बढ़त के चलते जम्मू-कश्मीर को विजेता माना गया। इस प्रदर्शन ने टीम की गहराई और दृढ़ता को दर्शाया, खासकर अंतिम दिन दबाव की स्थिति में बल्लेबाजों ने जिस तरह जिम्मेदारी निभाई, वह काबिले-तारीफ रहा।