कोर्ट ने हिंदू पक्ष द्वारा पेश किए गए सभी तथ्यों और दलीलों को रिकॉर्ड में शामिल कर लिया है। अब बुधवार दोपहर 2:30 बजे से मामले की तीसरे दिन की सुनवाई होगी, जिसमें नए साक्ष्य सामने आ सकते हैं। पूरे घटनाक्रम ने भोजशाला विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है और अगली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है।
बता दें कि भोजशाला विवाद से जुड़ा यह मामला वर्ष 2022 से लंबित है, जिसे अब नियमित सुनवाई में लिया गया है। सोमवार से शुरू हुई प्रक्रिया के तहत मंगलवार को दूसरे दिन भी कोर्ट में लंबी और गंभीर बहस हुई। डबल बेंच के सामने दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क मजबूती से रखे।
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हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में विस्तार से पक्ष रखा। उन्होंने कमाल मौला मस्जिद से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और उससे जुड़ी भ्रांतियों को सामने रखा। साथ ही वक्फ बोर्ड की आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए धार्मिक स्थलों की जमीन पर कथित कब्जों का मुद्दा भी उठाया।
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बहस के दौरान राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच के फैसले का जिक्र किया गया। तर्क दिया गया कि अगर किसी हिंदू धार्मिक स्थल को तोड़कर दूसरी इमारत बनाई जाती है, तो उसकी मूल पहचान खत्म नहीं होती। इस आधार पर भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष ने अपनी दलील को और मजबूत बनाने की कोशिश की।