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राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़ :PMO की मांग पर भी ट्रस्ट ने नहीं दिया वित्तीय ब्योरा, SIT जांच का दिया हवाला

अयोध्या राम मंदिर के दान, चढ़ावे और जमीन खरीद मामले में नया मोड़ आया है। PMO की ओर से मांगी गई वित्तीय जानकारी देने से राम मंदिर ट्रस्ट ने इनकार कर दिया है। ट्रस्ट ने कहा कि, मामला SIT जांच के दायरे में है। जानिए पूरा विवाद और अब तक क्या हुआ।
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PMO की मांग पर भी ट्रस्ट ने नहीं दिया वित्तीय ब्योरा, SIT जांच का दिया हवाला

अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले दान, चढ़ावे और जमीन खरीद से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से भेजी गई शिकायत के आधार पर जिला प्रशासन ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से वित्तीय जानकारी मांगी थी, लेकिन ट्रस्ट ने चल रही एसआईटी जांच का हवाला देते हुए फिलहाल कोई भी रिकॉर्ड साझा करने से इनकार कर दिया है।

मामले के सामने आने के बाद अयोध्या से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें विशेष जांच दल (SIT) की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।

PMO ने लिया संज्ञान, जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

भाजपा नेता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले को अयोध्या जिला प्रशासन के पास भेज दिया। इसके बाद जिला प्रशासन ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, संपत्तियों और जमीन खरीद-बिक्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संबंध में प्रशासन की ओर से ट्रस्ट महासचिव चंपत राय से संपर्क किया गया था।

ट्रस्ट ने क्यों नहीं दी जानकारी?

23 जून को प्रशासनिक स्तर पर हुए पत्राचार में ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट किया गया कि फिलहाल मामले की जांच एसआईटी कर रही है। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने प्रशासन को बताया कि, जांच एजेंसी सभी आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड एकत्र कर रही है। ऐसे में जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक मांगी गई वित्तीय जानकारी साझा नहीं की जा सकती। ट्रस्ट का कहना है कि, जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसलिए फिलहाल रिकॉर्ड सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।

Ram Mandir Donation Case

किन जानकारियों की मांग की गई थी?

पीएमओ को भेजी गई शिकायत में कई महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इनमें शामिल हैं-

  • ‘समर्पण निधि’ अभियान के तहत जुटाई गई राशि
  • नकद दान और अन्य वित्तीय योगदान
  • सोना, चांदी और आभूषणों के रूप में प्राप्त चढ़ावा
  • ट्रस्ट के बैंक खातों का विवरण
  • वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड
  • जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज
  • मंदिर निर्माण पर हुआ खर्च
  • प्रशासनिक खर्च का ब्योरा
  • ऑडिट और निरीक्षण रिपोर्ट

शिकायतकर्ता का कहना है कि, इतनी बड़ी धार्मिक परियोजना से जुड़ी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक होने से पारदर्शिता बढ़ेगी।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह की शिकायत से हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, दान राशि, चढ़ावे और जमीन खरीद-बिक्री में पारदर्शिता की मांग की थी।

डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को पहला और 12 जून को दूसरा पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट अपनी स्थापना से अब तक प्राप्त दान, संपत्तियों और खर्चों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे। शिकायत में मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता की कमी और जमीन खरीद से जुड़े सवाल भी उठाए गए थे।

13 जून को गठित हुई थी SIT

शिकायतों और आरोपों के बाद 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। एसआईटी को मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों, दान, चढ़ावे और अन्य दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब जांच एजेंसी मामले से जुड़े विभिन्न रिकॉर्ड, दस्तावेज और लेन-देन की पड़ताल कर रही है।

जांच के दायरे में जमीन खरीद 

दान और चढ़ावे के अलावा अब मंदिर ट्रस्ट द्वारा की गई जमीन खरीद भी जांच के दायरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 से अब तक हुए भूमि सौदों के दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेखों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि जमीनों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया, भुगतान प्रक्रिया कैसी रही और सभी सौदे नियमों के अनुरूप हुए या नहीं। कुछ मामलों में जमीन के बाजार मूल्य और खरीद मूल्य के अंतर को लेकर भी जांच जारी है।

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आम आदमी पार्टी के सांसद ने भी किए दावे

इस मामले में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी दावा किया है कि, उनके पास जमीन खरीद और चढ़ावे से जुड़े कुछ दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा है कि वह संबंधित दस्तावेज एसआईटी को सौंपेंगे ताकि जांच एजेंसी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सके। संजय सिंह पहले भी राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद से जुड़े कुछ मामलों को लेकर सवाल उठा चुके हैं।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

राम मंदिर देश की सबसे बड़ी धार्मिक परियोजनाओं में से एक है। ऐसे में दान, चढ़ावे और जमीन खरीद से जुड़े मामलों में उठे सवालों ने चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि ट्रस्ट ने किसी भी प्रकार की अनियमितता के आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई नई टिप्पणी नहीं की है और जांच का हवाला देकर रिकॉर्ड साझा करने से इनकार किया है।

अब यह मामला पूरी तरह एसआईटी की जांच और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितना दम है और वास्तविक स्थिति क्या है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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