राजा रघुवंशी मर्डर केस: राज कुशवाह सहित 4 की बेल खारिज, सोनम की जमानत रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंची मेघालय सरकार

इंदौर -- राजा रघुवंशी हत्याकांड में अब आरोपियों की मुश्किलें तेजी से बढ़ती नजर आ रही हैं। शिलॉन्ग सेशन कोर्ट ने इस बहुचर्चित मर्डर केस के मुख्य आरोपी राज कुशवाह समेत चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद साफ संकेत मिल गए हैं कि हत्या की इस गुत्थी में शामिल आरोपियों को फिलहाल कोई राहत मिलने वाली नहीं है।
दूसरी ओर, केस की सबसे चर्चित आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत अब नए कानूनी संकट में फंस गई है। मेघालय सरकार ने उसकी बेल को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। सरकार ने अदालत से साफ कहा है कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी को मिली राहत जांच और ट्रायल को प्रभावित कर सकती है। इस मामले में 12 मई को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी।
राज कुशवाह को लगातार दूसरा झटका
मामले के मुख्य आरोपी और सोनम के कथित प्रेमी राज कुशवाह को कोर्ट से लगातार दूसरी बार बड़ा झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने उसकी दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता, हत्या की साजिश और जांच की स्थिति को देखते हुए किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ने माना कि मामला साधारण हत्या का नहीं, बल्कि योजनाबद्ध साजिश से जुड़े गंभीर अपराध का है। यही वजह रही कि अदालत ने आरोपी को जेल से बाहर आने की अनुमति नहीं दी।
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विशाल, आनंद और आकाश को भी राहत नहीं
राज कुशवाह के अलावा इस चर्चित मर्डर केस में आरोपी विशाल, आनंद और आकाश ने भी कोर्ट से जमानत की गुहार लगाई थी, लेकिन अदालत ने चारों आरोपियों की दलीलों को खारिज कर दिया। फिलहाल आदेश की विस्तृत कॉपी सामने नहीं आई है, लेकिन फैसले ने आरोपियों के लिए कानूनी रास्ते और मुश्किल कर दिए हैं। माना जा रहा है कि जांच एजेंसियों द्वारा कोर्ट में पेश किए गए तथ्यों और केस डायरी ने आरोपियों की दलीलों को कमजोर कर दिया। यही कारण रहा कि अदालत ने उन्हें राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
सोनम की जमानत पर सरकार की आपत्ति
इधर, आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत अब बड़े विवाद का कारण बन गई है। मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि केस अभी संवेदनशील दौर में है और ऐसे में आरोपी को मिली बेल जांच की दिशा प्रभावित कर सकती है।सरकार का यह भी कहना है कि यदि आरोपी बाहर रहती है तो गवाहों और सबूतों पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट से बेल निरस्त करने की मांग की है।
पुलिस जांच पर उठे सवालों के बीच सरकार का बचाव
इस हाईप्रोफाइल केस में लगातार पुलिस जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई स्तरों पर जांच की निष्पक्षता और कार्रवाई के तरीके को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि मेघालय सरकार ने पुलिस और एसआईटी का खुलकर बचाव किया है।मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसोंग ने कहा कि पुलिस और एसआईटी ने हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच पूरी तरह पेशेवर तरीके से हुई और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई।उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों में जमानत को लेकर अलग-अलग स्तर पर फैसले आते रहते हैं, लेकिन इससे पुलिस जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना उचित नहीं होगा।
चौथी सुनवाई में मिली थी सोनम को राहत
गौरतलब है कि हाल ही में शिलॉन्ग कोर्ट ने चौथी सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी को जमानत दी थी। इस फैसले के बाद पूरे केस ने नया मोड़ ले लिया था। जमानत आदेश सामने आते ही पीड़ित पक्ष और जांच एजेंसियों के बीच हलचल तेज हो गई थी।
मामले की पुष्टि करते हुए शिलॉन्ग एसपी विवेक स्येम ने कहा था कि अदालत ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए आरोपी को राहत दी है।












